दिव्य नौ दिवसीय श्री राम चरित्र मानस का  विजयदशमी के दिन हुआ भव्य समापन!

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दिव्य नौ दिवसीय श्री राम चरित्र मानस का  विजयदशमी के दिन हुआ भव्य समापन!

श्री राम कथा का समापन: महंत जी बोले कथा सुनने से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या और भेदभाव मिट जाते है!

पिछले नो दिन से चल रही श्री राम कथा का समापन विजयदशमी को देर शाम हुआ। इस कथा का समापन शास्त्रोपासक महंत श्री 108 श्री राजेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में हुआ।

वैदिक धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्वाधान मैं आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा का शनिवार को विधिवत हवन पूजन व विशाल भंडारे के साथ समापन हुआ जिसकी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव और सूचना प्रभारी भानू प्रताप लवानिया ने दी!

शनिवार को राम कथा के समापन समारोह में रावण वध के साथ विभीषण को लंका के राजा के रूप मैं राज्य अभिषेक, वानरों की विदाई, राम राज्य वर्णन, गुरु काकभुशुण्डी के संवाद, ज्ञान भक्ति निरूपम रामायण महात्मय और श्री हनुमान जी की स्तुति आदि समापन दिवस की कथा मैं शामिल की।

महाराज जी ने कथा के दौरान बताया कि श्रवण से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या, और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं और कथा मन को शांत करती है और हिंसक भावनाओं को मन मैं आने से रोकती है।

महाराज जी ने राम नाम की महिमा के बारे में बताते हुए कहा कि राम का नाम अनमोल है, और यदि पापी भी राम का नाम लेता है, तो उसे सदगति मिल जाती है। जिनके हृदय में प्रभु के प्रति भाव जागते हैं, उन पर हरि की कृपा होती है।

महाराज जी ने यह भी कहा कि श्रीराम कथा का मनोयोग से श्रवण कर उसके उपदेश को जीवन में उतारना चाहिए, तभी कथा की सार्थकता है। मन और ध्यान की एकाग्रता से हर कार्य में सफलता मिलेगी।

महाराज जी ने बताया कि भगवान राम ने कैसे एक आज्ञाकारी पुत्र, आदर्श पति, प्रतिभाशाली भाई व एक कर्मठ राजा की तरह अपने कर्तव्यों का बखूबी पालन किया। साथ ही माता सीता के चरित्र का भी बहुत ही सहज भाव से वर्णन किया।

नव दिवसीय श्री राम कथा का समापन महाराज द्वारा विधिवत हवन पूजन संपन्न करवाकर विशाल भंडारे के साथ किया गया।

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