मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद निकायों और जिला पंचायतों को ₹410.48 करोड़ जारी

उत्तराखंड राज्य

देहरादून।  प्रदेश सरकार ने 102 नगर निकायों और 13 जिला पंचायतों के लिए धन की पोटली खोली है।

छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों और पांचवें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी त्रैमासिक किस्त की 410.48 करोड़ की राशि जारी की गई है।

इस राशि से नगर निकायों और जिला पंचायतों के कार्मिकों को वेतन, पेंशन भुगतान में कठिनाइयां दूर होंगी, साथ में सफाई व स्वच्छता कार्यों के लिए वाहनों की खरीद के लिए धन उपलब्ध हो सकेगा।

छठा राज्य वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप चुका है। विधानसभा के आगामी सत्र में इस रिपोर्ट को रखा जाना है।

इसके बाद आयोग की संस्तुतियों के आधार पर शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों को सरकार से अनुदान मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

छठे आयोग की संस्तुतियों के क्रम और पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई से सितंबर तक दूसरी तिमाही की किस्त की राशि अवमुक्त करने की पत्रावली को मुख्यमंत्री ने अनुमोदित किया।

इसके बाद अपर सचिव वित्त हिमांशु खुराना की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

आदेश के अनुसार नगर निगमों को 148.25 करोड़, नगर पालिका परिषदों को 141.94 करोड़ व नगर पंचायतों को 38.07 करोड़ की राशि दी गई है। प्रदेश की कुल 13 जिला पंचायतों को 82.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

कुल 410.48 करोड़ में से एक प्रतिशत यानी 3.24 करोड़ की राशि की कटौती केंद्रीयित पेंशन निधि के लिए की गई है।

शहरी निकायों को इस राशि का सबसे पहला उपयोग स्वीकृत पदों पर कार्यरत कार्मिकों के वेतन, भत्ते, पेंशन व सेवानिवृत्तिक दावों के भुगतान के लिए करना है।

इसके बाद पथ प्रकाश, जल संस्थान के देयकों के भुगतान को किया जाएगा। इसके बाद अवशेष राशि का कूड़ा वाहन, डंपर, टिप्पर, जेसीबी व कंपेक्टर जैसे स्वच्छता कार्यों में उपयोग में लाए जाने वाले वाहनों की खरीद में हो सकेगा।

जिला पंचायतों के कार्मिकों के वेतन व भत्तों के साथ उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के मानदेय के भुगतान पर होगा। जिला पंचायतों को न्यूनतम पांच प्रतिशत धनराशि संपत्तियों के रखरखाव एवं सृजन पर खर्च करने की छूट भी दी गई है।

निकायों व जिला पंचायतों कों 30 सितंबर, 2026 तक इस राशि का उपयोग करने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराना होगा।

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