मॉनसून की चुनौतियों से निपटने को तैयार उत्तराखंड, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर

उत्तराखंड राज्य

देहरादून: उत्तराखंड में मॉनसूनी बारिश हर साल कहर बरपाती है. इस साल मॉनसून से पहले ही बारिश ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है. यहीं कारण है कि सरकार ने अभी से मॉनसून की तैयारियां शुरू कर दी है. मंगलवार दो जून को चारधाम यात्रा की समीक्षा बैठक में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मॉनसून की तैयारियों पर भी चर्चा हुई.

उत्तराखंड में मानसून में अभी दस्तक भी नहीं दिया है, लेकिन प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश मुसीबत बनने लगी है. हाल ही में हुई बारिश के कारण देहरादून के भागीरथपुरम क्षेत्र में पार्क की दीवार गिरने से वाहनों को नुकसान पहुंचा था. केदारनाथ धाम की यात्रा को भी बारिश के कारण स्थगित करना पड़ा था. इसी वजह से सरकार मॉनसून की चुनौतियों को काफी गंभीरता से ले रही है.

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा कि आज की बैठक में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के लोग भी मौजूद थे. आगामी मॉनसून सीजन को लेकर बैठक में चर्चा की गई. प्रदेश में जो संवेदनशील क्षेत्र है, जहां पर सड़क मार्ग बाधित, लैंडस्लाइड या फिर आपदा जैसे हालात बन सकते है, वहां पर सभी तरह की व्यवस्थाएं जिसमें पोकलैंड, जेसीबी, आपदा के वाहन, एम्बुलेंस, स्वास्थ्य की टीम और हेली एम्बुलेंस पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई.

साथ ही सीएम धामी ने कहा कि हेली सेवाओं को लेकर एसओपी बनाई गई है. श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उत्तराखंड सरकार प्रदेश के तमाम पर्वतीय क्षेत्रों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है. ताकि प्रदेश में सीमांत क्षेत्रों में भी पर्यटक स्थल विकसित हो, जहां पर बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचे.

वहीं, सीएम धामी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी, देश में पहले ऐसे पीएम है, जिन्होंने पहले माणा गांव का भ्रमण किया था, जिसको देश का अंतिम गांव कहा जाता था. पीएम ने वही से माणा गांव समेत अन्य सीमांत गांवों को देश के प्रथम गांव की संज्ञा दी. उसके बाद पीएम आदि कैलाश, गुंजी, हर्षिल और मुखवा गये थेय ऐसे में पीएम मोदी की प्रेरणा से जितने भी उच्च हिमालयी क्षेत्र है, वो सभी देश और दुनिया के नक्शे पर आए.

सीएम ने कहा कि पीएम मोदी की ओर से आदि कैलाश का भ्रमण करने के बाद पिछले एक महीने में 30 हज़ार से अधिक श्रद्धालु, आदि कैलाश के दर्शन कर चुके है. इसके अलावा, नीति क्षेत्र में भी बहुत संभावनाएं है. मुनस्यारी के पास मिलम क्षेत्र है, वहां भी काम किया जाएगा. इसके अलावा बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र, नेलांग जदौन समेत प्रदेश के छोटे- छोटे स्थानों पर काम करेंगे, ताकि ये सभी क्षेत्र पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में जाने जाए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *