आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर नहीं चलेगा बुलडोजर, कमिश्नर कोर्ट से मिली बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश राज्य

यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर फिलहाल बुलडोजर एक्शन नहीं होगा। मुरादाबाद के कमिश्नर ने रामपुर के DM के फैसले पर रोक लगा दी है। आपको बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 बिग्डिंग्स अवैध पाई गई हैं। जांच के बाद रामपुर के DM ने अवैध बिल्डिंग्स को ध्वस्त करने का आदेश दिया था जिसके बाद बड़ी संख्या में छात्र जौहर यूनिवर्सिटी के बाहर जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। इस बीच मुरादाबाद के कमिश्नर ने आदेश जारी करते हुए रामपुर DM के फैसले पर रोक लगा दी है।

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के लिए ये बड़ी राहत है। यूनिवर्सिटी की अपील के बाद बुलडोजर एक्शन अंतिम फैसले तक रोका गया है।

आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है जौहर यूनिवर्सिटी

बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जब मुलायम सिंह सरकार में वो मंत्री थे तब उन्होंने 2006 में इसकी स्थापना की थी।  जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना 18 सितंबर 2006 को हुई थी लेकिन इसकी स्थापना होने के साथ ही यूपी से समाजवादी पार्टी की सरकार चली गई। आजम खान मंत्री नहीं रहे तो ऐसे में इसका उद्घाटन भी नहीं हो सका।

2006 में बनी, 2012 में उद्घाटन

6 साल बाद जब 2012 में यूपी में समाजवादी पार्टी की वापसी हुई, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने और आजम खान सबसे ताकतवर मंत्री बने तो 18 सितंबर 2012 को इसका उद्घाटन हुआ। यूनिवर्सिटी बनाने के समय रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ था तब जिला पंचायत का कार्यक्षेत्र था। 2 बिल्डिंग बनाते समय जिला पंचायत से मंजूरी ली गई लेकिन उसके बाद 38 बिल्डिंग बनी उसमें मंजूरी नहीं ली गई।

40 में से 38 बिल्डिंग को ध्वस्त करने का था आदेश

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था। रामपुर विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत की गई। आदेश में विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों को अवैध निर्माण की श्रेणी में माना गया और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए।

बता दें कि इससे पहले साल 2021 में जौहर विश्वविद्यालय से 70 हेक्टेयर से अधिक जमीन सरकार ने वापस ले ली थी। विश्वविद्यालय की जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित किए जाने के खिलाफ सांसद आजम खां की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के बाद यह यूनिवर्सिटी खां के हाथ से छिन गई थी।

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