नोएडा (सेक्टर-122)। ग्राम पृथला, सेक्टर-122 में खड़ी एक 5 मंजिला जर्जर इमारत मौत की इमारत बन चुकी है। इमारत की हालत इतनी खतरनाक हो चुकी है कि वह कभी भी भरभराकर गिर सकती है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण और पुलिस विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इस इमारत को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, अधिकारियों को मौके की गंभीरता से अवगत भी कराया गया है। इसके बावजूद प्राधिकरण और पुलिस एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?

ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इमारत के आसपास से रोजाना सैकड़ों लोग, बच्चे और बुजुर्ग गुजरते हैं। जरा सी तेज हवा या बारिश में इमारत के गिरने से बड़ा हादसा तय है।
भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश संगठन मंत्री सोनू यादव बिसरख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ इमारत नहीं, प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। हादसे के बाद जांच और मुआवजे का कोई मतलब नहीं। सरकार की जिम्मेदारी है कि हादसा होने से पहले उसे रोके। अगर इस इमारत से किसी की जान गई तो यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या मानी जाएगी और इसके जिम्मेदार अधिकारी होंगे।”
उन्होंने मांग की है कि –
1. इमारत का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए
2. इमारत को असुरक्षित घोषित कर तत्काल सील और खाली कराया जाए
3. आसपास बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही बंद की जाए
4. जरूरत पड़ने पर इमारत को तुरंत ध्वस्त किया जाए
5. शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई हो
जनहित में प्रशासन को “पहले दुर्घटना, फिर कार्रवाई” की नीति छोड़नी होगी।
