आगरा:-जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान आगरा में एक दिवसीय क्रियात्मक अनुसंधान कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए प्राचार्य पुष्पा कुमारी ने कहा कि यह कार्यशाला हमारे विद्यालयों की अनगिनत समस्याओं के कई संभावित समाधानों को उपलब्ध कराएगी। साथ ही समस्त शिक्षकों में क्रियात्मक अनुसंधान कार्यशाला द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी विकसित करेगा। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में आर.बी.एस. कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर प्रमेश पाल द्वारा क्रियात्मक अनुसंधान का अर्थ,आवश्यकता, इतिहास, शिक्षण में अनुसंधान के प्रयोग पर विस्तृत चर्चा की गई। वहीं दूसरे सत्र में बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष एवं पूर्व डीन, प्रोफेसर लता चंदोला द्वारा क्रियात्मक अनुसंधान के चरणों पर व्यावहारिक रूप से प्रकाश डाला गया और सदन में सभी प्रतिभागियों द्वारा मूल्यांकन एवं शिक्षण उद्देश्य से संबंधित समस्याओं को चुनते हुए संभावित समाधान पर प्रस्तुति भी करवाई गई। अंत में प्राचार्या द्वारा प्रमाण पत्र वितरण के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। इस अवसर पर कार्यशाला का समन्वयन डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय एवं डॉ प्रज्ञा शर्मा ने करते हुए बताया कि क्रियात्मक अनुसंधान शिक्षण अधिगम की स्वयं की समस्याओं का स्वयं के द्वारा समाधान पर बल देता है।
विद्यालय में क्रियात्मक अनुसंधान कार्यशाला का लाभ सभी प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों द्वारा व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर उपयोग में लाया जाएगा और उस कार्य की प्रिंट कॉपी सितंबर माह तक डायट आगरा में जमा करवाई जाएगी। इस कार्यशाला में अनिल कुमार, यशवीर सिंह, लक्ष्मी शर्मा,रंजना पांडे, कल्पना सिन्हा, हिमांशु सिंह,यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, धर्मेंद्र गौतम, अबु मुहम्मद आसिफ, संजीव सत्यार्थी, डॉ. डी.के. गुप्ता सहित प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए समन्वयक डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सभी प्रतिभागियों एवं विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया ।
