मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026: अब हर गांव तक पहुंचेगी बस सेवा

उत्तर प्रदेश राज्य

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत सभी गांवों तक बसें चलाने के लिए उन्हें परमिट की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी। यही नहीं ग्राम परिवहन योजना के अंतर्गत 15 से 28 सीट की क्षमता वाले डीजल, सीएनजी व इलेक्ट्रिक वाहन संचालित किए जाएंगे। शुक्रवार को योगी सरकार में परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

एनआईसी सेंटर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े परिवहन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को बेहतर ढंग से लागू किया जाना है। ऐसे में इसके संबंध में सभी तैयारियां पूरी की जाएं। राज्य सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत को सुगम व सस्ती परिवहन सेवा उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों को विकासखंडों, तहसीलों व जनपद मुख्यालयों से सीधे परिवहन सुविधा से शत-प्रतिशत जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में परिवहन निगम के तहसील मुख्यालय, नगर पालिका परिषद, नगर निगम स्तर पर परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश के दूरस्थ व असंबद्ध ग्राम पंचायतों को मुख्य धारा से जोड़ने व अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक परिवहन सेवा पहुंचाना इस योजना का मुख्य आधार है।

59163 ग्राम पंचायतों को परिवहन सेवा से जोड़ना है

परिवहन मंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत सभी 59163 ग्राम पंचायतों को परिवहन सेवा से जोड़ना है। ग्रामीण जनता को ब्लॉक, तहसील व जिला मुख्यालय तक सीधी व सुरक्षित पहुंच प्रदान करने के साथ ही निजी क्षेत्र के बस संचालकों के माध्यम से उन ग्रामीण मार्गों पर सेवा प्रदान करना, जहां परिवहन निगम की बसें संचालित नहीं हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव, परिवहन अर्चना अग्रवाल, एमडी परिवहन निगम प्रभु एन सिंह, परिवहन आयुक्त किंजल सिंह व विशेष सचिव, परिवहन केपी सिंह आदि मौजूद रहे।

मंगलवार को कैबिनैट में हुआ था यह फैसला

आपको बता दें कि योगी सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। इस दोरान परिवहन मंत्री दया शंकर ने बताया था कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी। इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी।

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