मीना अग्रवाल
नेचुरोपैथी
Liver test? करें अपने आप अब आप
घर पर ही करें लीवर की बेसिक जांच: 4 आसान टेस्ट – बहुत लोग यह जानना चाहते हैं कि उनका लीवर स्वस्थ है या नहीं आमतौर पर लीवर की जांच के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, जैसे लीवर फंक्शन टेस्ट लेकिन यह अपेक्षाकृत एडवांस जांच होती है।
दरअसल कुछ ऐसे बेसिक संकेत भी होते हैं। जिनसे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपके शरीर में वे जरूरी पैरामीटर ठीक हैं या नहीं जो लीवर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
अगर ये पैरामीटर सही हैं तो काफी संभावना होती है कि आपका लीवर भी ठीक से काम कर रहा है।
लेकिन अगर ये संकेत सही नहीं मिलते, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि अभी या भविष्य में लीवर से जुड़ी समस्या विकसित हो सकती है।
इसलिए इन बेसिक संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
यहां चार ऐसे आसान टेस्ट बताए जा रहे हैं जिन्हें आप घर पर ही कर सकते हैं। हर टेस्ट में आपको लगभग 20 सेकंड का समय लगेगा
अगर इन चार में से तीन टेस्ट आप पास कर लेते हैं तो इसका मतलब है कि आपके लीवर की सेहत ठीक रहने की संभावना काफी अच्छी है
लेकिन अगर आप केवल दो टेस्ट ही पास कर पाते हैं, तो बेहतर होगा कि एक बार लीवर फंक्शन ब्लड टेस्ट करवा लें ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके
अब एक-एक करके इन चारों टेस्ट को समझते हैं।
पहला टेस्ट: सांस रोकने का टेस्ट
यह टेस्ट फेफड़ों से जुड़ा है, लेकिन इसका संबंध लीवर से भी है।
टेस्ट कैसे करें?
आप आराम से खड़े होकर या बैठकर यह टेस्ट कर सकते हैं
गहरी सांस लें और फेफड़ों में पूरी हवा भरें।
अब उस सांस को लगभग 20 सेकंड तक रोककर रखने की कोशिश करें।
अगर आप 20 सेकंड तक बिना परेशानी के सांस रोककर रख लेते हैं। तो आपने यह टेस्ट पास कर लिया।
लेकिन अगर 10–15 सेकंड के
बाद ही आपको सांस छोड़नी पड़ जाती है, तो इसका मतलब है कि आपके फेफड़ों की क्षमता कम है और आप इस टेस्ट में सफल नहीं हुए।
इसका लीवर से क्या संबंध है?
जब फेफड़ों की क्षमता कम होती है तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
ऑक्सीजन की कमी का असर शरीर के कई अंगों पर पड़ता है, जिनमें लीवर भी शामिल है।
लीवर को शरीर को डिटॉक्स करने और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है अगर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, तो लीवर का काम प्रभावित हो सकता है और आगे चलकर उसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।
दूसरा टेस्ट: वॉल सीट टेस्ट
इस टेस्ट से शरीर की मांसपेशियों की ताकत का अंदाजा लगाया जाता है।
टेस्ट कैसे करें?
दीवार के सहारे खड़े हो जाएं, पीठ दीवार से सटी हो
अब ऐसे नीचे बैठें जैसे आप कुर्सी पर बैठते हैं।
आपकी जांघों और घुटनों का एंगल लगभग 90 डिग्री होना चाहिए।
इस पोजीशन में 20 सेकंड तक रुकने की कोशिश करें।
अगर आप 20 सेकंड तक आराम से इस स्थिति में रह सकते हैं तो आपने यह टेस्ट पास कर लिया
लेकिन अगर 10–15 सेकंड में ही आपको खड़ा होना पड़ता है तो इसका मतलब है कि आपकी टांगों की मांसपेशियां पर्याप्त मजबूत नहीं हैं।
इसका लीवर से क्या संबंध है?
जब शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तो वे ग्लूकोज को अच्छी मात्रा में अपने अंदर स्टोर कर लेती हैं। लेकिन अगर मांसपेशियां कमजोर हैं तो वे ग्लूकोज को पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पातीं।
ऐसी स्थिति में अतिरिक्त ग्लूकोज लीवर तक पहुंच जाता है और लीवर उसे फैट में बदल देता है यही फैट धीरे-धीरे पेट और लीवर के आसपास जमा होने लगता है और आगे चलकर फैटी लीवर का कारण बन सकता है।
तीसरा टेस्ट: आंखों और जीभ का निरीक्षण
यह टेस्ट बेहद आसान है और शरीर के अंदर बनने वाले टॉक्सिन्स के संकेत दे सकता है।
आंखों की जांच
आप आईने के सामने खड़े होकर अपनी आंखों को ध्यान से देखें
आंखों का जो सफेद हिस्सा होता है, उसका रंग पूरी तरह सफेद होना चाहिए अगर उस हिस्से में हल्का भी पीला रंग दिखाई देता है तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में बिलरुबिन बढ़ रहा है।
बिलिरूबिन का स्तर तब बढ़ता है जब लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा होताl
जीभ की जांच
अब अपनी जीभ बाहर निकालकर उसका रंग देखें।
स्वस्थ स्थिति में जीभ का रंग हल्का गुलाबी होना चाहिए।
अगर जीभ पर मोटी सफेद परत दिखाई देती है तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो रहे हैं।
इन टॉक्सिन्स को आम कहा जाता है।
अगर शरीर में आम अधिक बन रहा है तो इसका मतलब है कि पाचन तंत्र सही तरह से काम नहीं कर रहा और इसका दबाव लीवर पर भी पड़ सकता है।
चौथा टेस्ट: पेट अंदर खींचने का टेस्ट
यह टेस्ट पेट के अंदर जमा फैट का अंदाजा लगाने में मदद करता है।
टेस्ट कैसे करें?
आप खड़े होकर या कुर्सी पर बैठकर यह टेस्ट कर सकते हैं।
अपने पेट को अंदर की ओर खींचें, जैसे हम पैंट का बटन बंद करते समय करते हैं।
पेट को जितना अंदर खींच सकते हैं, खींचें और 20 सेकंड तक होल्ड करने की कोशिश करें।
अगर आप पेट को 20 सेकंड तक अंदर रख पाते हैं तो आपने यह टेस्ट पास कर लिया।
लेकिन अगर आप पेट को ज्यादा अंदर नहीं खींच पाते या 10–15 सेकंड के बाद पेट बाहर आने लगता है तो यह संकेत हो सकता है कि पेट के अंदर विसरल फैट जमा हो रहा है
यह वही फैट होता है जो पेट के अंदरूनी अंगों, खासकर लीवर के आसपास जमा होता है और फैटी लीवर का कारण बन सकता है
अगर टेस्ट सही नहीं आते तो क्या करें।
अगर इन टेस्ट में आपको दिक्कत महसूस होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान आदतें अपनाकर आप धीरे-धीरे अपने शरीर के इन पैरामीटर को बेहतर बना सकते हैं।
सुबह गुनगुना पानी पीना दाल चीनी पाउडर के साथ अवश्य ले।
सुबह उठते ही खाली पेट दो गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें
इसे उषापान कहा जाता है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय होता है। और शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं इससे लीवर को भी डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।
रोजाना तेज चाल से चलना।
दिन में कम से कम 20 मिनट तेज चाल से चलने की आदत डालें
तेज चलने से खासकर टांगों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब मांसपेशियां मजबूत होती हैं तो वे ग्लूकोज को बेहतर तरीके से उपयोग करती हैं, जिससे अतिरिक्त ग्लूकोज लीवर में जमा नहीं होता।
चीनी का सेवन कम करना।
अधिक मात्रा में चीनी का सेवन सीधे लीवर पर असर डालता है और फैट बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। इसलिए चीनी का सेवन सीमित रखना जरूरी है
अगर आप रोज सुबह गुनगुना पानी पीना शुरू करते हैं, नियमित रूप से तेज चाल से चलते हैं और चीनी का सेवन कम करते हैं, तो धीरे-धीरे शरीर के ये सभी पैरामीटर बेहतर होने लगते हैं।
कुछ महीनों के भीतर आपकी फेफड़ों की क्षमता बढ़ेगी, मांसपेशियां मजबूत होंगी और पेट के आसपास जमा फैट भी कम होने लगेगा।
जब ये सभी चीजें बेहतर होंगी तो इसका सीधा फायदा आपके लीवर की सेहत को भी मिलेगा।
Health is wealth
मीना अग्रवाल
आगरा
