संदीप पुत्र मामराज बाइज्जत बरी, विशेष न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी ने कहा – सबूत नहीं तो सजा नहीं
कागजी गैंग चार्ट से नहीं बनता कोई गैंगस्टर, अभियोजन का दावा अदालत में खोखला साबित
अधिवक्ता त्रिमूर्ति ने रचा इतिहास, एडवोकेट संदीप कुमार, चेतराम सिंह और प्रवीण कुमार की पैरवी बनी मिसाल
सूरजपुर, गौतमबुद्धनगर। न्याय की चक्की धीरे चलती है, लेकिन पीसती बहुत बारीक है। इस कहावत को चरितार्थ किया है विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) कोर्ट नंबर-3, गौतमबुद्धनगर ने। माननीय विशेष न्यायाधीश श्री सौरभ द्विवेदी ने 30 सितंबर 2026 को 20 साल पुराने चर्चित मामले विशेष वाद संख्या 32/2006, थाना कासना में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए संदीप पुत्र मामराज सिंह, निवासी झाझर, ककोड़ को गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 से बाइज्जत बरी कर दिया।
थाना कासना पुलिस ने वर्ष 2006 में मु0अ0सं0 53/2006 के तहत गैंग चार्ट तैयार कर संदीप को गैंग लीडर दर्शाया था। चार्ट का आधार तीन मुकदमों 11/2006, 12/2006 और 13/2006 को बनाया गया था।
इस लड़ाई को कानून की जमीन पर लड़ा और जीता है सूरजपुर के तीन जुझारू अधिवक्ताओं – एडवोकेट संदीप कुमार, चेतराम सिंह एडवोकेट और प्रवीण कुमार एडवोकेट ने।
अदालत में अधिवक्ताओं ने अभियोजन के केस की एक-एक परत उधेड़ दी। दलील दी गई कि गैंग चार्ट में दर्शाए गए दोनों लूट के मुकदमे अज्ञात में दर्ज हैं, अभियुक्त से लूट का एक भी सामान बरामद नहीं है और समाज का एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो भय या आतंक की गवाही देता हो। सबसे बड़ी बात यह कि जिस 307 के मुकदमे 13/2006 को गैंग चार्ट का आधार बनाया गया, उसमें संदीप 15 जून 2026 को ही बरी हो चुका है।
अधिवक्ताओं ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पंचम यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि केवल कागज पर गैंग चार्ट बनाकर और जिलाधिकारी से अनुमोदन लेकर किसी भी व्यक्ति को गैंगस्टर नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए भय, आतंक, हिंसा और अवैध संपत्ति जैसे ठोस तत्वों का होना जरूरी है, जो इस पूरे मामले में दूर-दूर तक मौजूद नहीं हैं।
तीनों अधिवक्ताओं की अकाट्य दलीलों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि अभियोजन पक्ष गैंगस्टर एक्ट के अनिवार्य तत्वों को संदेह से परे साबित करने में पूर्णतः विफल रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि एडवोकेट संदीप कुमार, चेतराम सिंह और प्रवीण कुमार ने जिस तैयारी और मजबूती से पैरवी की है, वह युवा अधिवक्ताओं के लिए एक पाठशाला है और बार की गरिमा को बढ़ाने वाला है।
