गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में आरटीई अभिभावकों ने मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ जी से भेंट कि और अभिभावकों ने दाखिले से संबंधित अपनी अपनी पीड़ा से अवगत कराया जिस पर सीडीओ साहब ने अभिभावकों की पीड़ा सुनी,और तत्काल बीएसए से फोन पर वार्ता की। सीडीओ साहब ने शाम 4:00 बजे बीएसए को तलब करने की बात कही।अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम अधिनियम 2009 के तहत दाखिला प्रक्रिया का निजी स्कूलों द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा है। जिस पर गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष कौशलेंद्र सिंह व आरटीई प्रभारी धर्मेंद्र यादव ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि यह कोई नया मामला नहीं है प्रत्येक वर्ष आरटीई से संबंधित दाखिलों को सुनिश्चित करने में अभिभावकों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है तब भी दुर्बल, आलाभीत वर्ग समूह के बच्चे अपने मौलिक अधिकार शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, जिसका मुख्य कारण शिक्षा विभाग की लापरवाही व ढीला रवैया साफ तौर पर दिखाई देता है। ज़िला प्रशासन आरटीई अधिनियम का अनुपालन कराने में विफल नजर आता है। शिक्षा विभाग स्कूलों को नोटिस पर नोटिस जारी करता रह जाता है और स्कूल उन नोटिसों कि परवाह न करते हुए डस्टबिन का रास्ता दिखाते रहते हैं। प्रत्येक वर्ष कि कहानी है।प्राइवेट स्कूलों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई न होने के कारण आरटीई दाखिला प्रक्रिया का समय निकल जाता है, और बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।आखिर इसका जिम्मेदार कौन?पीड़ित अभिभावक कहां और किस पटल पर गुहार लगाएं?। आरटीई चयनित बच्चों का दाखिला ना लेने में लाइनपार क्षेत्र के मुख्य रूप से डीएवी स्कूल प्रताप विहार विजय नगर, गौतम पब्लिक स्कूल विजय नगर, जेकेजी विजयनगर, चिल्ड्रनस एकेडमी विजय नगर,आदि के अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई।
जीपीए सचिव अनिल सिंह ने साफ तौर पर चेतावनी दी है अगर वर्तमान सत्र के अभिभावकों के बच्चों का जो आरटीई में चयनित हुए हैं दाखिला सुनिश्चित नहीं हुआ, अभिभावकों कि सहमति पर जीपीए के नेतृत्व में पीड़ित अभिभावक बस भरकर लखनऊ मुख्यमंत्री दरबार में कूच करने को मजबूर होंगे। जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी क्योंकि बहुत हुआ हर साल की यही व्यथा है आरटीई एक्ट का अनुपालन सही ढंग से न होने के कारण गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन मुख्यमंत्री दरबार जाने को मजबूर है।
वही जीपीए अधिकारी नरेश कुमार कीर ने शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन पर प्रश्न उठाते हुए पूछा की आरटीई दाखिला प्रक्रिया को घर-घर पात्र अभिभावकों बच्चों तक पहुंचाना सिर्फ दिखावा मात्र था??? या सरकार वाकई गरीब दुर्बल आलाभीत समूह वर्ग के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है? जबकि वर्तमान सत्र में पोर्टल तकनीकी खामियों, देरी से आवेदन प्रक्रिया के कारण अपेक्षा से कम आवेदन हुए हैं।
नरेश कीर ने आगे बताया की कुछ शिकायतें ऐसी भी प्राप्त हुई है जिसमें आरटीई के बच्चों का दाखिला न होने पर निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को प्रताड़ित किया जाता है अनावश्यक कागजात की मांग की जा रही है जो नियमों के विरुद्ध है वहीं दूसरी और जब अभिभावक यह शिकायतें लेकर शिक्षा विभाग के कार्यालय पर जाते हैं तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों का रवैया अभिभावकों के प्रति मैत्रीपूर्ण व सहायक नहीं होता। नरेश कीर ने शासन से मांग की है कि जो अधिकारी व शिक्षा विभाग में कार्यरत संबंधित अधिकारी है, अभिभावकों से इस तरह का अनैतिक व्यवहार करते हैं उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया जाना चाहिए।
इस अवसर पर राजू सैफी, कौशल ठाकुर, साहिल, नरेश कीर,धर्मेंद्र यादव, कौशलेंद्र सिंह सहित काफी संख्या में पीड़ित अभिभावक महिलाएं पुरुष बच्चों संग मौजूद रहे।
