एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव का नतीजा: बागी आर्यन बेलवाल बने अध्यक्ष, एबीवीपी तीसरे नंबर पर खिसकी

उत्तराखंड

हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज को मंगलवार की मध्य रात्रि छात्रों की नई सरकार मिल गई है। त्रिकोणीय मुकाबले में एबीवीपी के बागी निर्दल प्रत्याशी आर्यन बेलवाल मैदान मारकर छात्र संघ के 45 वें अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनएसयूआई उम्मीदवार मेहुल साह को 466 मतों से पराजित किया है। अध्यक्ष पद पर दो बार से काबिज विद्यार्थी परिषद तीसरे स्थान पर रही।

कालेज में मंगलवार को अध्यक्ष और सचिव सहित नौ पदों के लिए मतदान हुआ। सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक वोटिंग हुई। जिसमें 12800 छात्र-छात्राओं में से कुल 4063 विद्यार्थी ही वोट डालने पहुंचे। इसके बाद शाम 3:30 बजे से एलबीएस बहुद्देश्यीय भवन मतगणना की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और चार बजे से काउंटिंग का क्रम शुरू हुआ।

रात करीब 12:45 बजे तक 18 राउंड में मतगणना हुई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रो. एलएम पांडे ने बताया कि अध्यक्ष पद पर आर्यन बेलवाल को 1723, मेहुल साह को 1257 और धीरज बिष्ट को 988 वोट पड़े। उपाध्यक्ष में पूरन सिंह मेवाड़ी ने वशिष्ठ कुमार को 145 वोटों से हराया। उपाध्यक्ष छात्रा में दीपा रैकुनी ने श्रेया पांडे को 303 वोटों से पराजित किया। सचिव पद पर सार्थक रस्तोगी ने भविष्य रावत को 394 मतों से हराया।

कोषाध्यक्ष में अक्षिता आर्या ने दीपा बिनवाल को 379 वोटों से मात दी। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद पर यतिन पांडे ने करन सिंह डोभाल को 805 मतों से हराया। संयुक्त सचिव में रिषिका सिंह और सांस्कृतिक सचिव में चंद्रकांत निर्विरोध चुने गए। इधर, प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी ने विजयी प्रत्याशियों को शपथ दिलाते हुए बधाई दी।

एमबीपीजी कॉलेज की नई छात्र संघ

अध्यक्ष : आर्यन बेलवाल
सचिव : सार्थक रस्तोगी

उपाध्यक्ष : पूरन सिंह मेवाड़ी
उपाध्यक्ष छात्रा : दीपा रैकुनी

संयुक्त सचिव : रिषिका सिंह
कोषाध्यक्ष : अक्षिता आर्या

सांस्कृतिक सचिव : चंद्रकांत
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि : यतिन पांडे

कला संकाय प्रतिनिधि : अदिति पाठक
विज्ञान संकाय प्रतिनिधि : कोमल आर्या

वाणिज्य संकाय प्रतिनिधि : आयुष माहेश्वरी

एबीवीपी तीसरी बार हैटट्रिक से चूकी, चौथी बागी को सत्ता

एमबीपीजी कॉलेज में एबीवीपी 16 वर्षों में तीसरी बार अध्यक्ष पद पर हैटट्रिक बनाने से चूकी है। इससे पहले वर्ष 2013 और 2019 में भी मौका आया था, लेकिन जीत नहीं मिल पाई। वहीं, चौथी बार विद्यार्थी परिषद के बागी ने जीत दर्ज की है। इससे पहले वर्ष 2014, 2016 और 2022 के चुनावों में एबीवीपी से टिकट न मिलने पर निर्दल मैदान में उतरे उम्मीदवार जीत चुके हैं।

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