मथुरा में पूर्व विधायक की कार में टक्कर, गनर को थप्पड़ — नशे का स्टेयरिंग किसके हाथ?
वी पी एस खुराना
मथुरा जनपद की धर्मनगरी में सड़कों पर इन दिनों रफ्तार से ज्यादा नशे का नशा दौड़ रहा है। ताजा मामला कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रदीप माथुर की कार में टक्कर और उनके गनर को थप्पड़ मारने का है, जिसने कई बड़े सवालों को बीच चौराहे खड़ा कर दिया है — बिल्कुल उसी तरह जैसे हादसे के बाद बीच सड़क खड़ी क्षतिग्रस्त कार ने जाम लगा दिया था।
बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे भूतेश्वर तिराहे पर तेज रफ्तार कार ने पूर्व विधायक की गाड़ी में टक्कर मार दी। गनीमत रही कि दोनों तरफ कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन नशे में धुत युवकों का “हौसला” जरूर चोटिल नहीं हुआ। बहस हुई, विरोध हुआ और गनर को थप्पड़ जड़ दिया गया। पुलिस आई, दो युवक पकड़े गए, एक भाग निकला… और फिर शुरू हुआ मथुरा का सबसे पुराना खेल — फोन, सिफारिश और समझौता।
नेताजी के पास माफी के फोन आए और मामला यहीं “शांत” हो गया। शिकायत नहीं दी गई… और पुलिस ने भी राहत की सांस ले ली।
अब सवाल यह है कि —
👉 क्या मथुरा की सड़कों पर कानून एफआईआर का मोहताज है?
👉 शिकायत न हो तो क्या अपराध भी “समझौता योग्य” हो जाता है?
ध्यान दिला दें कि अभी कुछ दिन पहले ही थार सवार युवकों द्वारा एक ट्रक चालक की पीट-पीटकर हत्या का मामला पूरे शहर को हिला चुका है। तब कहा गया था कि सख्ती होगी, कार्रवाई होगी, नशेड़ी और हुड़दंगियों पर लगाम लगेगी। लेकिन हालात यह हैं कि अब आम आदमी ही नहीं, खास आदमी भी सुरक्षित नहीं।
यह मामला सिर्फ एक नेता की कार का नहीं है —
यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें
नशे में टक्कर मारो, थप्पड़ चलाओ, रिश्तेदार फोन घुमाओ और घर जाओ।
अगर कल यही पुलिस किसी आम व्यक्ति की शिकायत पर देर कर दे तो यही नेताजी सबसे आगे खड़े मिलेंगे और प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर देंगे। इसलिए कानून का तराजू व्यक्ति देखकर नहीं, घटना देखकर चलना चाहिए।
चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे धूल खाने के लिए नहीं हैं।
पुलिस चाहे तो —
फरार युवक की पहचान हो सकती है
वाहन नंबर से पूरी कहानी खुल सकती है
और नशे के खिलाफ सख्त संदेश भी जा सकता है
वरना मथुरा की जनता यही कहेगी —
“सड़क पर नशेड़ी मजबूत, कानून समझौते पर मजबूर।”
अब देखना यह है कि वर्दी “समझौते” का सम्मान करती है या कानून का।
क्योंकि हादसा टल गया… लेकिन सवाल अभी भी चौराहे पर खड़ा है।
