श्रीराधा रानी के परम् भक्त थे निकुंज लीला प्रविष्ट सन्त विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा)

उत्तर प्रदेश राज्य

स्नेह माधुरी कुंज में धूमधाम से सम्पन्न हुआ सन्त-विद्वत सम्मेलन

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन। गौरा नगर कॉलोनी (चार सम्प्रदाय आश्रम के पीछे) स्थित स्नेह माधुरी कुंज में प्रख्यात सन्त नित्य लीला प्रविष्ट विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) की स्मृति में विराट संत-विद्वत सम्मेलन अत्यन्त एवं धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ। जिसके अंतर्गत समस्त संतों, विद्वानों, धर्माचार्यों, भक्तों-श्रद्धालुओं व शिष्य परिकर के द्वारा सन्त प्रवर विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) का पावन स्मरण करके उन्हें वाक पुष्पांजलि अर्पित की गई।सर्वप्रथम आचार्य नरोत्तम प्रसाद चतुर्वेदी व आचार्य पुरुषोत्तम शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।
तत्पश्चात चिंतामणि कुंज के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज एवं चतु:संप्रदाय के श्रीमहंत बाबा फूलडोल बिहारीदास महाराज ने कहा कि निकुंजवासी विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) अत्यन्त सहज, सरल, उदार व परोपकारी सन्त थे।उन्होंने अपना समूचा जीवन गौ, सन्त, विप्र, ब्रजवासी व निर्धन-निराश्रित आदि की सेवा में व्यतीत किया।उन जैसे संतों से ही पृथ्वी पर धर्म व अध्यात्म का अस्तित्व है।
अध्यक्षता करते हुए चार सम्प्रदाय आश्रम के महंत ब्रजबिहारी दास महाराज एवं महंत रामस्वरूप दास महाराज ने कहा कि निकुंज लीला प्रविष्ट सन्त विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) श्रीराधा रानी के परम् भक्त थे।पूज्य महाराजश्री ने अपनी साधना की शक्ति से कई बार प्रभु की निकुंज लीलाओं का दर्शन किया।
पूज्य महाराजश्री की परम् कृपापात्र शिष्या साध्वी मीरा बहिनजी एवं प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि हमारे सदगुरुदेव विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) ने श्रीधाम वृन्दावन में कठोर साधना करते हुए कई वर्षों तक मौन व्रत धारण किया था।इसीलिए उन्हें मौनी बाबा के नाम से जाना जाता है।
बड़ी छावनी आश्रम के महंत रामकल्याण दास महाराज एवं संस्कृत के परम् विद्वान आचार्य नेत्रपाल शास्त्री ने कहा कि सन्त विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) परम् भजनानंदी व निस्पृह संत थे।उन जैसे संतों से ही सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति पल्लवित व पोषित होती है।
अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के ब्रज प्रान्त अध्यक्ष पण्डित बिहारीलाल वशिष्ठ एवं प्रख्यात भजन गायक बनवारी महाराज ने कहा कि सन्त विवेकानंद महाराज (मौनी बाबा) ने कई वर्षो तक मधु करी करके अपना पालन पोषण किया। पूज्य महाराजश्री को विभिन्न रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों के रोगों के निवारण हेतु अनुष्ठान करने में महारथ हासिल था।
सन्त-विद्वत सम्मेलन में शुकाचार्य पीठाधीश्वर डॉ. रमेश चंद्राचार्य विधिशास्त्री महाराज, सन्त प्रवर रामदास महाराज, प्रमुख शिक्षाविद् जगदीश नीलम, संगीताचार्य पंडित देवकीनंदन शर्मा, महंत श्याम दास महाराज, महंत श्रीहित गोविन्द शरण महाराज, आचार्य विष्णु मोहन नागार्च, आचार्य रामनिवास शुक्ला, भगवताचार्य हरि भारद्वाज महाराज, गंगा मंदिर के सेवायत व “बांसुरी” संस्था के अध्यक्ष विनय गोस्वामी, डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य सुदामा शास्त्री, पण्डित मोहन वल्लभ शर्मा, बाबा गिर्राज सिंह, मनोज शास्त्री , महावीर प्रसाद शास्त्री, पुरुषोत्तम शरण महाराज, लालजी महाराज, दीनदयाल खंडेलवाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
महोत्सव में प्रमुख रूप से मुकेश खंडेलवाल, कुशलेश खंडेलवाल, बसन्त कुलकर्णी, ललित कुलकर्णी (भोपाल), मुरली दास महाराज, सुखदेव दास महाराज (काकाजी) आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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