‘चार भागों में बंटेगा यूपी, राजभर समाज का बेटा बनेगा मुख्यमंत्री’, ओमप्रकाश राजभर का बड़ा दावा

उत्तर प्रदेश राज्य

देवरिया में सुभासपा की सामाजिक समरसता रैली में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक दांव चला है । राजभर ने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने कहा कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बना तो वहां राजभर समाज का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण में हिस्सेदारी और जातिगत जनगणना का मुद्दा भी उठाया।

राजभर ने आरक्षण का मुद्दा भी उठाया

देवरिया के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज के मैदान में रविवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की सामाजिक समरसता रैली आयोजित हुई। करीब साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंचे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मंच से आरक्षण, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। ओपी राजभर ने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने दावा किया कि पूर्वांचल अलग राज्य बना तो वहां राजभर समाज का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा। राजभर ने 27 फीसदी आरक्षण में हिस्सेदारी का मुद्दा उठाते हुए आरक्षण के बंटवारे की मांग दोहराई।

ओपी राजभर ने कहा कि जातिगत जनगणना के बाद आरक्षण में हिस्सेदारी के सवाल पर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि पिछड़े वर्ग को 1993 से 27 फीसदी आरक्षण मिल रहा है, लेकिन इसका लाभ कुछ ही जातियों तक सीमित रह गया है। उन्होंने आरक्षण के लाभ को सभी पिछड़े वर्गों तक पहुंचाने के लिए इसके बंटवारे की जरूरत बताई।

राजभर बोले- पीएम मोदी के सामने उठा चुका हूं मुद्दा

सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण में बंटवारे की मांग को लेकर लखनऊ में दो बार पंचायत की गई। इसके बाद केंद्र स्तर पर रोहिणी आयोग का भी गठन हुआ। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के सामने भी उठाया गया है।  रैली में राजभर ने गरीबों के इलाज, आयुष्मान कार्ड और पेंशन समेत सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ाना जरूरी है। समाज के बेटा-बेटी पढ़ेंगे, तभी विकास संभव होगा। इससे पहले निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने भी प्रयागराज में रैली कर आरक्षण का मुद्दा उठाया।

बता दें कि यूपी में विधानसभा चुनाव अगले कुछ ही महीने में होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि फरवरी-मार्च के बीच चुनाव हो सकते हैं। चुनाव से पहले सभी दल अभी से ही जनता के बीच जाने लगे हैं। लगातार रैलियां की जा रही हैं।

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