लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असम और पश्चिम बंगाल में जोरदार चुनावी प्रचार करते हुए कुल 27 जनसभाएं और कई रोड शो किए। उनका यह अभियान 3 अप्रैल को असम से शुरू हुआ और सोमवार को पश्चिम बंगाल में अंतिम दिन की रैलियों और रोड शो के साथ समाप्त हुआ।
असम से हुई अभियान की शुरुआत
चुनावी दौरे की शुरुआत असम के सोनितपुर (बरछला) और बारपेटा से हुई, जहां शुरुआती जनसभाओं के माध्यम से माहौल बनाने की कोशिश की गई। इन सभाओं में उन्होंने पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने पर जोर दिया और स्थानीय मुद्दों को उठाकर मतदाताओं से संवाद स्थापित किया।
पश्चिम बंगाल में तेज हुआ प्रचार अभियान
12 अप्रैल से पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियां और तेज हो गईं। इस दौरान पूर्व मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पश्चिम बर्धमान और वीरभूम जैसे जिलों में लगातार जनसभाएं आयोजित कर संगठन को मजबूती देने का प्रयास किया गया।
उत्तर और दक्षिण बंगाल में संतुलित रणनीति
18 अप्रैल को उत्तर बंगाल के कूच बिहार और जलपाईगुड़ी के साथ बांकुड़ा में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके बाद 20 अप्रैल को पश्चिम मेदिनीपुर और पुरुलिया में जनसभाएं कर ग्रामीण इलाकों में पकड़ मजबूत करने की कोशिश की गई।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
22 अप्रैल को हावड़ा, नदिया और कोलकाता में सभाओं के जरिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को साधने की रणनीति अपनाई गई। वहीं 25 अप्रैल को कटवा, नबाद्वीप और बगदा में कार्यक्रम कर प्रचार अभियान को निरंतर जारी रखा गया।
अंतिम चरण में रोड शो और जनसभाएं
अभियान के अंतिम दिन सोमवार को उत्तर 24 परगना के कल्याणी और दमदम विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो किए गए। इसके साथ ही हुगली के धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर में जनसभाओं को संबोधित किया गया।
आरक्षित सीटों पर विशेष ध्यान
पूरे चुनावी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों पर खास ध्यान केंद्रित किया। इन क्षेत्रों में अधिक सभाएं कर सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति अपनाई गई।
