सहायक प्रदेश संगठन आयुक्त द्वारा जॉच समिति पर आपत्ति दर्ज करते हुए उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग
लखनऊ। सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त (गा०) प्रज्ञा सिंह बड़े आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की की हैं मांग। उन्होंने पत्र लिखकर इस तरह जताया है आरोप- सेवा में. अध्यक्ष / प्रादेशिक मुख्यायुक्त महोदय भारत स्काउट और गाइड उ०प्र०। गोल मार्केट महानगर, लखनऊ।
विषय: जॉच समिति पर आपत्ति दर्ज कराने के सन्बन्ध में।
महोदय,आपके पत्रांक संख्या-आर जी, 28 (55) /1652/2024-25, दिनांक-03.10.2024 के तथा पत्रांक संख्या-आर जी, 28 (55)/1637/2024-25. दिनांक-03.10.2024 के सन्दर्भ में कहना है कि-
1. यह कि इस जाँच समिति में पूर्णतः संस्था व स्काउटिंग के पदों से जुडे व्यक्ति शामिल है चूकि कार्यकारी प्रादेशिक सचिव जोकि अभी भी पद पर है उनके द्वारा जाँच समिति के व्यक्तियों पर दबाव की स्थिति बनाई जा सकती है। इसलिए मैं इस जॉच समिति में कोई भी सहयोग प्रदान नहीं कर पाउँगी।
2. यह कि यदि कोई भी जाँच समिति बनाई जाए, तो उसमें एक न्यायिक व्यक्ति तथा शासन का एक उच्च पदाधिकारी के साथ-साथ स्काउटिंग / गाइडिंग का कोई व्यक्ति व महिला आयोग से किसी सदस्य को सम्मिलित किया जाना चाहिए।
3. यह कि श्री आंनद सिंह रावत कार्यकारी प्रादेशिक सचिव के पदेन सचिव रहते हुए मुझे आपके द्वारा इस बनाई गई जॉच समिति से कोई न्याय की उमींद नहीं है।
4. यह कि श्री आंनद सिंह रावत कार्यकारी प्रादेशिक सचिव को सर्वप्रथम पद से हटाकर पुनः नई जॉच समिति बनाई जाए।
5.. यह कि विधिक नियमानुसार हमें उचित समय पाने का अधिकार था, परन्तु आपके द्वारा मुझे 3 अक्टूबर दोपहर के समय ई-मेल व व्हाट्सप पर पत्र के द्वारा सूचित कर दिया जाता है कि मुझे 7 अक्टूबर को जॉच के लिए उपस्थित होना है। जिससे यह साफ पता चलता है कि यह दुर्भावना पूर्वक लिया गया निर्णय है।
6. यह कि जॉच समिति द्वारा निष्पक्ष जाँच हो सके इसके लिए स्थान का चुनाव प्रादेशिक मुख्यालय गोल मार्केट महानगर को छोडकर किसी भी अन्य स्थान का चयन किया जाना चाहिए।
7. यह है कि अपनी सुविधा के लिए मैं जॉच के समय अपने साथ अपने अधिवक्ता को भी उपस्थित रखूंगी।
अतः आपसे अनुरोध है कि किसी महिला अधिकारी के सम्मान व रक्षा के लिए नई जॉच समिति बनाई जाए जिसमें एक न्यायिक व्यक्ति तथा शासन का एक उच्च पदाधिकारी के साथ-साथ स्काउटिंग/गाइडिंग का कोई व्यक्ति तथा महिला आयोग से किसी सदस्य को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए, नही तो महोदय सत्य कभी भी सामने नहीं आ सकेगा ।
पिड़ित प्रज्ञा सिंह सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त (गा०) अयोध्या मण्डल, अयोध्या ने आगे मुख्य आयुक्त को पत्र इस तरह लिखकर अवगत कराया है कि सेवा में,अध्यक्ष / प्रादेशिक मुख्यायुक्त भारत स्काउट और गाइड उ०प्र० । गोल मार्केट, महानगर, लखनऊ। विषय: कार्यकारी प्रादेशिक सचिव द्वारा किए जा रहे शोषण के संबन्ध में।
महोदय, मैं प्रज्ञा सिंह सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त (गा०) अयोध्या, मण्डल, अयोध्या। (वर्तमान कार्यरत) जैसा कि अवगत है कि मेरी पूर्व तैनाती कानपुर मंडल में थी जहां मैं लगभग 18 महीनों तक कार्यरत् थी इन 18 महीनों में से 6 माह प्रादेशिक, मुख्यायुक्त के निर्देशानुसार कानपुर नगर के जिला सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार भी, मुख्य विकास अधिकारी के द्वारा प्रदान किया गया, पद के दायित्व का निर्वाहन करते हुए, मैंने जिला संस्था के दस्तावेजों की जॉच में काफी हद तक वित्तीय अनियमताओं को पाया, जिसके कारण मुझे इसकी स्पष्ट जॉच के लिए मुख्य विकास अधिकारी से ऑडिट की, स्वीकृति लेनी पडी। श्री आर सी शर्मा जी पूर्व जिला मुख्यायुक्त कानपुर नगर को जब, इसकी खबर लगी तो श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) से मिलकर षंयन्त्र, की रचना शुरू कर दी, उसी के तुरन्त बाद से ही मुझे कानपुर नगर के जिला सचिव से व, मंडल से हटाया जाए, इसकी प्रक्रिया आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के द्वारा प्रारम्भ की जाने लगी। इसी प्रकरण में दिनांक-21.06.2024 को श्री आर सा शर्मा जी (पूर्व जिला मुख्यायुक्त कानपुर नगर) प्रादेशिक कार्यालय आते है और श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के समक्ष मुझे अपमान जनक/अभद्र टिप्पणियों करते हुए अपमानित करते है, जिससे की सारा कार्यालय अवगत है। तत्पश्चात् जब मेरे द्वारा इनके किसी भी तरीके से गंदे / अनियमित/असंवैधानिक प्रस्तावों को नही स्वीकार किया गया, तो अधिकार पत्र का मुद्दा बनाकर देर रात्रि को श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के द्वारा मुझे आदेश दिया जाने लगा, जिसमें दिनांक-07.08.2024 को लगभग 9:30 से 10:30 के मध्य फोन व मैसेज से मुझे आदेश दिया जाता है कि कल दिनांक-08.08.2024 को जिलाधिकारी महोदय के कार्यालय में अधिकार पत्र वितरण समारोह है आप प्रातः 9 बजे पहुंच जाना और अपने जिला मुख्यायुक्त/नगर आयुक्त को भी पहुंचने को कह दो, तथा कानपुर नगर के अधिकारिक ग्रुप में यह सूचना भेज कर मुझे उसका स्कीन शॉट भेजो, इसके प्रति उत्तर में जब मेरे द्वारा यह प्रश्न किया गया कि इस कार्यक्रम की स्वीकृति व सूचना न ही मेरे द्वारा जिलाधिकारी महोदय से और न ही नगर आयुक्त जी से प्राप्त की गई और न उनके द्वारा मुझे दी गई है, फिर यह कार्यक्रम किस प्रकार संभव है, (नोट: चूकि
किसी भी कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेत सम्बन्धित अधिकारी को कार्यमुक्त कराने हेतु पूर्व में पत्र निर्गत किया जाता है। तो श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के द्वारा मुझे कहा जाता तुमसे जितना कहा जाता है उतना करो, यदि नहीं किया तो तुमारे ऊपर कार्यवाही की जायेगी और कहते कि प्रभात सर की जिलाधिकारी से बात हो गई है, क्या तुम भी डीएम हो जो फोन करवायें। इस तरह मेरे ऊपर गहरा मानसिक दवाब देकर मुझ से नियम विरुध्द सूचना प्रसारित करवाई जाती है। तदुपरान्त श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी के आदेशों के अनुपालन में मैं प्रातः ही जिलाधिकारी महोदय के कार्यालय पहुँच गई, लेकिन बडे आश्चर्य की बात थी कि वहां पर जिला संस्था का कोई भी पदाधिकारी उपस्थित नहीं मिला सिवाय श्री आंनद सिंह रावत (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी तथा श्री आर सी शर्मा जी (पूर्व जिला मुख्यायुक्त कानपुर नगर), जो की उसी दिन उनके द्वारा उक्त कार्यक्रम की तिथि व समय लिया जाता है। लेकिन अगले ही दिन दिनांक 09.08.2024 को श्री आंनद सिंह रावत जी (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) द्वारा पत्र निर्गत किया जाता है जिसमें मुझे बिना किसी कारण बताएं जिला सचिव कानपुर नगर व जनपद कानपुर नगर के कार्यदायित्व से मुक्त कर दिया जाता है। जोकि जिला सचिव को हटाने का अधिकार कार्यकारी प्रादेशिक सचिव के अधिकार क्षेत्र विषय कदाभि नहीं होता है। (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के तत्काल आदेश के अनुपालन में मेरे द्वारा जिला सचिव का कार्यदायित्व अधिकृत अधिकारी को दिनांक-13. 08.2024 को हस्तांरित कर दिया, लेकिन फिर भी (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) का मेरी प्रति व्यक्तिगत रौस खतम नही होता है, उसके ठीक एक माह बाद दिनांक-13.09.2024 को अवेलहना भरे शब्दों में पत्र दिया जाता है कि मेरे द्वारा पूर्ण रूप से जिला सचिव का कार्यदायित्व नहीं सौंपा गया है। (अज्ञात सूचानओं के आधार पर), फिर भी मेरे द्वारा पुनः अवकाश के दिन जाकर नए सिरे से कार्यदायित्व सौंप कर (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी को अवगत करा दिया गया।.(पत्र में उल्लेखित समस्त कथनों के साक्ष्य प्रार्थिनी के पास उपलब्ध है।) इस तरह महोदय (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) श्री आंनद सिंह रावत जी के द्वारा मुझे लगभग तीन माह से पत्रों व अनियमियत आदेशों के द्वारा मानसिक, शारीरिक रूप से प्रताडित करने का कार्य किया गया है जोकि अभी भी जारी है। (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी के द्वारा निर्गत समस्त पत्रों में सम्बोधन में सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त (गा०) तथा आदेश जिला सचिव के कार्यक्षेत्र का जोकि पूर्णतः नियम विरूध्द व अमान्य है।
महोदय मैं लगभग 20 वर्षों से स्काउंटिंग/गाइडिंग आन्दोलन से जुड कर कार्य कर रही हूँ, लेकिन (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी के द्वारा मेरे मनोबल को मिट्टी में मिलाने का कार्य किया जा रहा है।
अतः महोदय मैं जानना चाहती हूँ कि मेरे द्वारा स्काउट/गाइड पावन संस्था में पूरी मेहनत निष्ठा व ईमानदारी से कार्य करने का क्या यही प्रतिफल है, कि (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) जी अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति के लिए इतनी हदें पार कैसे कर सकते हैं, तथा आप द्वारा प्रदान किए गए पद का दुरूपयोग इस तरह से किसी महिला अधिकारी कों
बेवजह खुन्नस बस मानसिक / शारीरिक / चारित्रिक प्रताडना देने में उपयोग क्यों कर रहे है।
अध्यक्ष महोदय / प्रादेशिक मुख्यायुक्त जी से मैं यह भी जॉच की मांग करती हूँ कि) श्री आंनद सिंह रावत जी जब प्रादेशिक प्रशिक्षण आयुक्त के पद पर थे तो उनके द्वारा किए गए गलत कार्यप्रणाली के चलते प्रयागराज प्रादेशिक प्रशिक्षण केंद्र में हेड क्वाटर कमिश्नर के पद पर कार्यरत् शिव शर्मा चौधरी ने आत्महत्या कर ली थी, ऐसे ही प्रकरण में अभी तत्काल में जिससे लगभग पूरा उ०प्र० का स्काउट/गाइड जगत अवगत है, स्वर्गीय श्री प्रदीप गुप्ता जी सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त (स्का०) पद पर थे, जिन्होनें दिनांक-12.08.2024 को आत्महत्या कर ली, निश्चत ही वह भी इसी कार्य प्रणाली से कुंठित होकर ऐसे कदम उठाये होगें मुझे ऐसी प्रबल शंका है। कार्यालय व कार्य कभी भी जीवन से बडा नहीं हो सकता, महोदय (कार्यकारी प्रादेशिक सचिव) के द्वारा सदैव से ही अपने पद का दुरूपयोग कर अधिकारियों / कर्मचारियों का हर प्रकार से अत्यधिक शोषण करने का दुष्टतम कार्य किया जा रहा है, ऐसा व्यक्ति हर प्रकार से संस्था के लिए घातक सिध्द हो सकता है, जिसकी मानवीय संवेदनाएं मृत हो चुकी हो, जिसने मुझे भी आज उसी मुहावने पर लाकर खडा कर दिया है।
अतः मैं अध्यक्ष महोदय/प्रादेशिक मुख्यायुक्त जी से अनुरोध करती हूँ कि कृपया मेरे भविष्य को अंधकार में जाने से बचा लिजिए। इसमें तत्काल न्यायसंगत व नियम के अनुरूप कार्यवाही करने की कृपा करें।
