उत्तराखंड भाजपा में चुनावी सुगबुगाहट: 70 सीटों का गणित और बूथ की हकीकत जानने मैदान में उतरे भाजपा के 3 दिग्गज

उत्तराखंड राज्य

देहरादून। उत्तराखंड के वर्ष 2027 के चुनावी रण में भाजपा के तीन नए सारथी शुक्रवार से मैदान में होंगे। प्रदेश प्रभारी राम माधव, सह प्रभारी बांसुरी स्वराज व अरविंद मेनन दो दिवसीय प्रवास पर आज देहरादून पहुंचेंगे। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद तीनों का यह पहला संगठनात्मक प्रवास है।

प्रदेश संगठन से लेकर जिलों, विधानसभा क्षेत्रों और बूथों तक संगठन कितना तैयार है, तीनों नेता इसकी थाह लेंगे। भाजपा ने उत्तराखंड में पहली बार एक प्रभारी के साथ दो सह प्रभारियों की व्यवस्था की है। राम माधव के साथ बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी की नई टीम के पहले प्रवास को इसी संगठनात्मक ढांचे की जमीन पर पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। तीनों नेता प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और सातों मोर्चों के साथ संवाद करेंगे।

पहले दिन प्रदेश नेतृत्व, फिर संगठन का मंथन

दो अक्टूबर की दोपहर प्रदेश कार्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ परिचयात्मक बैठक होगी। इसके बाद शाम को मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन और प्रभारी-सह प्रभारियों की बैठक प्रस्तावित है। यहां संगठन की स्थिति और आगामी चुनावी तैयारियों पर चर्चा होगी।

तीन अक्टूबर को सुबह सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं से संवाद, पुरस्कार वितरण और आंगनबाड़ी केंद्र के दौरे का कार्यक्रम है। दोपहर में सातों मोर्चों के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक होगी। पहले दिन प्रदेश संगठन की तस्वीर तीनों के सामने आएगी, वहीं दूसरे दिन मोर्चों के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों तक संगठन की पहुंच को वह समझने की कोशिश करेंगे।

70 सीटों का गणित, बूथ की हकीकत

तीन सारथी प्रदेश की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों, कमजोर और पिछली बार हारी सीटों पर संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और मोर्चों की भूमिका पर फीडबैक लेंगे। प्रदेश नेतृत्व की रिपोर्ट और बूथ स्तर की वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है, यह भी चर्चा का हिस्सा रहेगा।

सीटों से पहले संगठन की नब्ज

इस प्रवास का एक महत्वपूर्ण पहलू संगठन की उन कड़ियों को समझना होगा, जहां प्रदेश की रणनीति और बूथ की सक्रियता के बीच दूरी हो सकती है। जिलों से मिलने वाला फीडबैक आगे की विधानसभा और बूथवार तैयारी का आधार बनेगा।

दो दिन की बैठकों में मिली जानकारी के आधार पर संगठन की कमजोर कड़ियों को चिह्नित करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विधानसभा स्तर की तैयारियों को गति देने की रूपरेखा तैयार होगी। यानी चुनावी रथ के पहिए प्रदेश मुख्यालय से निकलकर जिलों और बूथों तक किस गति से घूमेंगे, इसकी दिशा इस प्रवास के मंथन से तय होगी।

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