बम्बावड़ में विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन, ओजस्वी वक्ताओं ने जगाया राष्ट्रभाव

उत्तर प्रदेश राज्य

बम्बावड़, गौतमबुद्ध नगर। स्वामी दयानंद सरस्वती इंटर कॉलेज, बम्बावड़ में शनिवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। सम्मेलन का मूल उद्देश्य समाज में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण का सशक्त संदेश देना रहा।
सम्मेलन की मुख्य वक्ता ओजस्वी प्रवक्ता मीनाक्षी शेरावत ने अपने प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक संबोधन से उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि चूड़ियां कभी भी कमजोरी का प्रतीक नहीं होतीं, बल्कि वे शक्ति, स्वाभिमान और परिवर्तन की प्रतीक हैं। उन्होंने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसे शरीर और आत्मा का अस्तित्व एक-दूसरे के बिना अधूरा है, उसी प्रकार भारत की भूमि हमारी आत्मा है और उसमें निवास करने वाला समाज उसकी जीवात्मा है। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र की रक्षा नहीं करेंगे, तो राष्ट्र का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद और स्वामी श्रद्धानंद के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे स्वयं को जानने के लिए निकले, तब उन्होंने अनुभव किया कि राष्ट्र ही सर्वोपरि है। “यदि राष्ट्र है तो हम हैं, अन्यथा हमारा अस्तित्व शून्य है।” उन्होंने कहा कि सामान्य जीवन में अहंकार त्याज्य है, किंतु राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ति के लिए गर्व होना आवश्यक है। यह गर्व समाज को संगठित और सशक्त बनाता है।
मीनाक्षी शेरावत ने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि विदेशों में रहने वाले कुछ परिवारों के बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता की कमी देखी जा रही है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को धर्म, ईश्वर, श्रीमद्भगवद्गीता और महाभारत जैसे महान ग्रंथों का ज्ञान दें, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और किसी भी प्रकार के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी संतानों को सही मार्गदर्शन नहीं देंगे, तो समाज की दिशा भ्रमित हो सकती है। इसलिए परिवार से ही संस्कारों की नींव मजबूत करनी होगी।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नोएडा विभाग के संचालक सुशील अग्रवाल ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा का प्रभावशाली वर्णन किया। उन्होंने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों के अनुरूप संघ का उद्देश्य राष्ट्र में ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है, जो कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हों। उन्होंने कहा कि जिस दिन समाज स्वयं राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने लगेगा, उस दिन संगठन की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी। वर्तमान समय में समाज और संगठन का समन्वय ही राष्ट्र की शक्ति है।
सम्मेलन का कुशल संचालन अनिल मावी ने किया। इस अवसर पर दादरी विधायक तेजपाल नागर, ओमवीर आर्य एडवोकेट, ईश्वर भाटी, दीपक नागर, जितेंद्र भाटी, चन्द्रपाल प्रधान, प्रदीप वेध, तरुण नागर, डॉ. अशोक नागर, राजेन्द्र नागर, धीर राणा, मुकेश एडवोकेट, सतवीर नागर, ललित नागर, कपिल नागर, रवि बीडीसी, कल्याण नागर (बार कोषाध्यक्ष), राजेश नागर, अरुण नागर सहित अनेक प्रमुख नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया और समाज में एकता, संस्कृति एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। सम्मेलन ने बम्बावड़ क्षेत्र में नई चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, जो आने वाले समय में सामाजिक एकजुटता को और मजबूत करेगा।

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