धामी सरकार की होम स्टे नीति से पहाड़ों में बढ़ा रोजगार, 6,500 प्रवासी लौटे गांव

उत्तराखंड राज्य

देहरादून। धामी सरकार की होम स्टे नीति ने पहाड़ के गांवों में पर्यटन को नई रफ्तार देने के साथ ही रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा दिया है। बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं होम स्टे व्यवसाय से जुड़कर स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। यही नहीं, राज्य में करीब साढ़े छह हजार प्रवासी अपने गांव लौटे हैं, जिनमें से 22 प्रतिशत से अधिक ने होम स्टे व्यवसाय को अपनाया है।
दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार का अनुदान दिया जा चुका है। पर्वतीय क्षेत्रों में परियोजना लागत की 50 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये तथा मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत, अधिकतम 7.50 लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।

रुद्रप्रयाग का सारी गांव होम स्टे आधारित पर्यटन का उदाहरण बनकर उभरा है। यहां 40 से अधिक होम स्टे संचालित हैं और ट्रेकर्स व पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।

जादूंग में बन रहे छह होम स्टे

पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी के सीमांत जादूंग गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में है। भारत-चीन युद्ध के दौरान खाली कराए गए जादूंग और नेलांग गांव अब वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में शामिल हैं।

258 लोगों को मिला लाभ

”मेरी योजना मेरी सरकार” कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना भी संचालित है। चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है।

‘हमारे गांव खुशहाल होंगे तो प्रदेश और देश भी खुशहाल होंगे। इस ध्येय वाक्य के साथ हम पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाना चाहते हैं। इस दिशा में होम स्टे योजना कारगर सिद्ध हुई हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के होम स्टे व्यवसाय अपनाने से जहां युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं, वहीं हमारे गांव देश विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।’

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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