BJP मोर्चों और प्रकोष्ठों की बैठक: CM धामी का कांग्रेस पर हमला, बोले- ‘विपक्ष के झूठ का तथ्यों से दें जवाब’

उत्तराखंड राज्य

देहरादून। राज्य सरकार के सुशासन और विकास के रिपोर्ट कार्ड को भाजपा अब चुनावी राजनीतिक का आधार बनाएगी। प्रदेश मोर्चों और प्रकोष्ठों की संयुक्त बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी राम माधव ने यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगले चार से छह महीने उपलब्धियों को जनसंवाद और चुनावी रणनीति में बदलने के हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुशासन के आधार पर बार-बार जनसमर्थन हासिल करने की जो परंपरा स्थापित की, उत्तराखंड में भी उसे आगे बढ़ाया जाएगा। अब मोर्चे व प्रकोष्ठ भी सरकार का रिपोर्ट कार्ड लेकर सामाजिक क्षेत्रों में उतरेंगे।

हरिद्वार रोड स्थित होटल ली ओवल में आयोजित बैठक में भाजपा के मोर्चों व प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रभारी राम माधव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में सुशासन की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया।

इसके बाद भाजपा की कई सरकारों ने सुशासन और विकास के आधार पर जनता के बीच दोबारा समर्थन हासिल किया। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है।

अब इन उपलब्धियों को संगठन के माध्यम से जनता तक पहुंचाने और सीधे संवाद में बदलने की जरूरत है। राम माधव ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में सरकार ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में काम किया है और संगठन भी सक्रिय रहा, लेकिन चुनाव नजदीक आने के साथ कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी है।

अब मोर्चों और प्रकोष्ठों को अपने-अपने सामाजिक क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को लेकर सीधे जनता के बीच जाना होगा। बैठक में उन्होंने चुनावी तैयारी को गति देने और संगठन की गतिविधियों को राजनीतिक लक्ष्य से जोड़ने पर जोर दिया।

बार-बार झूठ को सच साबित करने में जुटी कांग्रेस: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मोर्चों और प्रकोष्ठों को सरकार की उपलब्धियों के साथ जनता के बीच सक्रिय होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के काम को लेकर कार्यकर्ता क्षेत्र में जनता के बीच जाएं और विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब दें।

धामी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बार-बार झूठ को सच साबित करने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि संगठन की सक्रियता को अब चुनावी जनसंपर्क में बदलने का समय आ गया है।

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