सिरमौर के दो युवाओं का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर गौरवपूर्ण प्रवेश

राज्य हिमाचल प्रदेश

नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के दो युवा शनिवार को भारतीय सेवा में लेफ्टिनेंट बने। दोनों युवाओं ने राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मु की गरिमामय उपस्थिति में इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून में देश सेवा की शपथ ली। उसके बाद लेफ्टिनेंट तेजेंद्र ठाकुर परिजनों के साथ पांवटा साहिब पहुंचे तथा उसके बाद अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हुए।

भूतपर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र के पदाधिकारी नरेंद्र सिंह ठुंडू ने बताया कि शनिवार को सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के नाम एक ओर उपलब्धि दर्ज हुई। जब क्षेत्र के दो वीर सपूतों लेफ्टिनेंट तेजेंद्र ठाकुर सुपुत्र अतर ठुंडू गांव भेड़ीवाली (नजदीक सालवाला सतौन) और लेफ्टिनेंट विवेक चौहान सुपुत्र लेफ्टिनेंट कर्नल जगत चौहान गांव लोजा हलांह तहसील शिलाई ने इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामय उपस्थिति में देश सेवा की शपथ ग्रहण की।

आईएमए देहरादून में शनिवार को कुल 515 अधिकारियों में 481 भारतीय कैडेट्स थे। जिसमें पहली बार 9 महिला कैडेट्स व 16 मित्र देशों के 34 कैडेट्स शामिल रहे।

हिमाचल के लिए गर्व का पल

वहीं, भूतपर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र के पदाधिकारियों ने गर्मजोशी के साथ पांवटा साहिब पहुंचने पर लेफ्टिनेंट तेजेंद्र ठाकुर व उनके परिजनों का स्वागत किया। तदोपरान्त क्षेत्र और देश के शहीद जवानों को याद करते हुए शहीद स्मारक स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजली अर्पित की। संगठन के अध्यक्ष करनैल सिंह ने बताया की यह क्षेत्र, प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय है। यह मुकाम कड़ी मेहनत और समर्पण नतीजा है।

बता दें कि लेफ्टिनेंट तेजेंद्र सिंह सीधे शपथ समारोह से घर लोटे और पांवटा साहिब के शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि के उपरांत पैतृक गांव भेड़ीवाली में उनका समारोह आयोजित कर स्वागत और अभिनंदन किया गया।

इस मौके पर पांवटा साहिब में लेफ्टिनेंट तेजेंद्र ठाकुर के चाचा सतपाल ठुंडू और भूतपूर्व सैनिक सगंठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र से अध्यक्ष करनैल सिंह, उपाध्यक्ष रामभज धीमान, सचिव ओमप्रकाश, कोषाध्यक्ष इन्द्र सिंह, नरेंद्र ठुंडू, संतराम, हाकम सिंह, स्वर्णजीत, अनिल ठुंडू, जगदीश, तपेंद्र, रोशन, दलीप, सुनील, देवेन्द्र नेगी, प्रवेश व प्रताप ठुंडू तथा पैतृक गांव में माता पिता और रिश्तेदारों के अलावा सेंकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

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