जब प्रेम शिव सा गहरा और समर्पण शक्ति सा अटल हो, तब हर रिश्ता महाशिवरात्रि बन जाता है : समाजसेवी पंकज जैन

उत्तर प्रदेश राज्य

शिव परिवार की पूजा से मिलता है समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद : पंकज जैन

यह पर्व हमें सिखाता है कि अलग-अलग गुणों वाले सदस्य भी प्रेम, सम्मान और सामंजस्य के साथ एक आदर्श परिवार का निर्माण कर सकते हैं।

आगरा, संजय सिंह। महाशिवरात्रि की समस्त श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए समाजसेवी पंकज जैन ने कहा कि जब प्रेम भगवान शिव सा गहरा और समर्पण माता पार्वती की शक्ति सा अटल हो, तब हर रिश्ता स्वयं महाशिवरात्रि का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि शिव परिवार की आराधना से एक साथ अनेक देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

पंकज जैन ने अपने संदेश में कहा कि भगवान शिव वैराग्य, तप और त्याग के प्रतीक हैं, जबकि माता पार्वती गृहस्थ जीवन, मातृत्व और शक्ति की साकार अभिव्यक्ति हैं। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालु महादेव की उपासना कर आत्मिक शांति, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।

उन्होंने शिव परिवार को आदर्श परिवार बताते हुए कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और विघ्नहर्ता के प्रतीक हैं, वहीं कार्तिकेय साहस, पराक्रम और शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक साथ इन सभी की पूजा करने से जीवन के विविध आयामों – ज्ञान, शक्ति, संतुलन और समृद्धि में सफलता प्राप्त होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अलग-अलग गुणों वाले सदस्य भी प्रेम, सम्मान और सामंजस्य के साथ एक आदर्श परिवार का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि महादेव की आराधना जीवन में आध्यात्मिकता और सांसारिक कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देती है। शिव का वैराग्य और पार्वती का गृहस्थ धर्म इस सत्य को रेखांकित करता है कि जीवन में संतुलन ही वास्तविक साधना है।

अपने संबोधन के अंत में पंकज जैन ने सभी श्रद्धालुओं से महाशिवरात्रि के अवसर पर आत्मचिंतन, संयम और सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने प्रार्थना की कि देवों के देव बाबा महाकाल सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा उनका आशीर्वाद प्रत्येक परिवार पर सदैव बना रहे।

उन्होंने कहा कि इस पावन पर्व पर श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव का स्मरण कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लें और समाज में प्रेम, सौहार्द एवं सेवा की भावना को सुदृढ़ करें।

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