रुद्रपुर में ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर पूर्ण प्रतिबंध

उत्तराखंड

भू-जल संकट के चलते जिला प्रशासन का सख्त फैसला

रुद्रपुर। जनपद में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन के आदेश के अनुसार 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक धान की बुवाई, नर्सरी तैयार करने और रोपाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

क्यों लिया गया यह निर्णय

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान की खेती में अत्यधिक मात्रा में पानी की जरूरत होती है। तराई क्षेत्र में भू-जल के अंधाधुंध दोहन के कारण जलस्तर तीन से चार मीटर तक नीचे चला गया है। जिले में हर साल लगभग 96 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है, जिससे जल संकट और गहराता जा रहा है।

पहले भी लग चुकी है रोक

वर्ष 2025 में भी तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा ग्रीष्मकालीन खेती पर रोक लगाई गई थी। उस समय किसानों ने प्रशासन से अनुमति की मांग की थी, लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने पहले से ही सख्त रुख अपनाते हुए किसी भी प्रकार की छूट न देने का फैसला किया है।

डीएम का स्पष्ट संदेश

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि ग्रीष्मकालीन खेती के दुष्परिणामों, कृषि वैज्ञानिकों और किसान संगठनों की सहमति के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि फरवरी से अप्रैल तक जिले में धान की खेती नहीं होगी।

कब होगी खरीफ धान की बुवाई

प्रशासन के अनुसार खरीफ सीजन में धान की सीधी बुवाई 1 मई से 30 जून तक की जा सकेगी। इसी अवधि में रोपाई के लिए नर्सरी तैयार की जाएगी। साथ ही किसानों को मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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