मीना अग्रवाल
Naturopathy
रसभरी शिमला, दार्जिलिंग, अल्मोड़ा आदि पहाड़ी क्षेत्रों में होती है। यह सदय (सदाबहार) गुल्म होती है। इसके फल छोटे व गोल अंडाकार, कच्चा होने पर हरे परन्तु पकने पर पीले, बैंगनी, लाल या काले रंग के हो जाते हैं। रसभरी चयापचय (metabolism), पाचक व लघु तथा उदर रोग नाशक है।
इसका प्रभाव दर्द निवारक होता है। यह स्वादिष्ट एवं पुष्टिकारक होती है। इसका रस मधुराम्ल होता है। इससे (Liver) यकृत, गुर्दे, तिल्ली तथा आँतों से संबंधित रोग ठीक होते हैं। इसमें साइट्रिक एसिड, विटामिन ‘C’ की प्रधानता तथा लोहा पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह कब्ज भी दूर करती है।
इसमें पोटैशियम की मात्रा 320 मि. ग्राम अत्यधिक तथा सोडियम मात्र 0.9 मि. ग्राम प्रति 100 ग्राम होता है। फलतः गुर्दे के लिए यह उत्तम (Tonic) है। यह रक्तवाहिनियों एवं हृदय को शक्तिशाली बनाती है। उच्च (High B.P.) को भी ठीक करती है। इसमें कैरोटीन भी काफी मात्रा में होता है। इसलिए यह आंतरिक तथा बाह्य संक्रमण को निष्प्रभावी करने की उत्तम औषधि है। इससे रक्त साफ़ होता है, चर्म रोग दूर होते हैं। यह परम शोधक आधार है। इसमें विटामिन ‘C’, ‘B1’, ‘B2’ व ‘D’, लोहा, फास्फोरस, कैल्शियम व सेल्यूलोज होता है।
यह रक्तचाप, सूजन, हृदयरोग, बवासीर में अति लाभदायक है। काली मकोय ठंडी होती है। इसकी पत्तियों में लोहा अधिक होता है। इसका रस पीने से रक्तहीनता तथा पथरी। इसका रस पीने से पथरी की बीमारी दूर होती है। यह प्लीहा, यकृत, गुर्दे को सशक्त बनाती है। यह पीलिया, सूजन, यकृत, प्लीहा तथा गुर्दे के रोग, कैंसर तथा आमाशयिक व्रण (ulcer) में अति लाभदायक है।
ये गुर्दे (Kidney) की बीमारी में बहुत लाभकारी है। इसमें पोटैशियम तथा विटामिन ‘A’ तथा ‘C’ प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम, ऑक्सीजन, सल्फर, क्लोरीन, लोहा, फास्फोरस आदि तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में कैरोटीन तथा थियामिन होता है जो कमजोर दृष्टिदोष वाले तथा त्वचा के स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोग निवारण के लिए उत्तम आधार है।
स्ट्रॉबेरी
इसे कश्मीर में इस्ताबेरी कहते हैं। यह विशेष रूप से कश्मीर, महाबलेश्वर, पंचगनी में होता है। इसमें उच्चतम किस्म के खनिज लवण होते हैं। इसका कच्चा फल या पका हुआ फल ज्यादा दिन रखने से जल्दी ही खराब हो जाता है। इसमें मुख्य रूप से साइट्रिक अम्ल तथा विटामिन ‘C’ होता है। न्यून मात्रा में मैलिक अम्ल भी होता है। इसमें एस्कॉर्बिक अम्ल का स्थायित्व अधिक होता है।
इसका प्रभाव मूत्रल होता है। यह High B.P., हृदय रोग, गठिया, संधिवात के रोगियों के लिए यह उत्तम आधार तथा औषधि है। यह संक्रमण को दूर करता है। स्ट्रॉबेरी के अतिरिक्त सभी प्रकार की बेरीज में लाइकोपिन तथा एल्लाजिक एसिड पाया जाता है जो कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। क्षतिग्रस्त डी.एन.ए. की मरम्मत करता है। आंत, आमाशय, अग्नाशय, प्रोस्टेट तथा ब्रेस्ट कैंसर से रक्षा करता है।
सभी प्रकार की बेरीज में प्रबल एन्टी ऑक्सीडेंट, विटामिन ‘C’ होता है जो दिल की बीमारी, कैंसर, संक्रमण, फेफड़े के रोग, गठिया, संधिवात, बुढ़ापा, जनन रोग, मोतियाबिंद एवं मधुमेह से रक्षा करता है। साथ ही ब्लैक बेरीज में बहुत लाभकारी है। इसमें तीव्र गंध होती है जो भूख को बढ़ाती है। इसके रस में तांबा, शर्करा, लोहा उच्चतम किस्म का होता है जो अति शीघ्र खून में मिल जाता है तथा शरीर के विभिन्न अवयवों एवं रस-रसायनों के निर्माण में भाग लेता है। इसके प्रयोग से दस्त, गुर्दे तथा यकृत (Liver) के रोग तथा बुखार ठीक होता है।
ब्लैक बेरी में प्रबल एन्टी ऑक्सीडेंट शक्ति होती है। इसमें एक खास प्रकार का फाइटोकेमिकल एल्लाजिक एसिड पाया जाता है जो कैंसर के आक्रमण को धराशायी कर देता है।
जो भी (berries) बेरीज हैं, सभी का इतना प्रभाव कैंसर पर पड़ता है कि बेरीज कैंसर Cells के ऊपर अपने Blood की लाइन बिछा देती हैं। जो भी Berries के बारे में Detail में बताया है, हमने आपको अपने Article में। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बेरीज का सेवन करें।
(Health is Wealth)
मीना अग्रवाल,
आगरा
