देवभूमि रक्षा मंच का आंदोलन की घोषणा, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप

उत्तराखंड राज्य

देहरादून। देवभूमि रक्षा मंच ने धौलास भूमि प्रकरण समेत विभिन्न मामलों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप लगाते हुए आंदोलन की घोषणा की है।

संगठन ने आरोप लगाया कि धौलास क्षेत्र में भूमि लेनदेन के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

उत्तरांचल प्रेस क्लब में हुई प्रेस वार्ता में कहा देवभूमि रक्षा मंच के कृष्ण बोहरा ने कहा कि धौलास भूमि प्रकरण में कुछ अधिकारियों और बाहरी संगठनों की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय या सीबीआई जांच कराने, संबंधित ट्रस्ट पदाधिकारियों, कथित रूप से जुड़े व्यक्तियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कथित आर्थिक क्षति की वसूली की मांग की।

उन्होंने ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के एक ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

इसके साथ ही मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने ने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए उधमसिंह नगर में एक किसान की आत्महत्या प्रकरण में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। मंच का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के मानक आम लोगों से अलग नहीं होने चाहिए।

देवभूमि रक्षा मंच ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र की मनमानी के कारण आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है। देवभूमि रक्षा मंच ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो 25 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

इसके बाद 2 से 4 मार्च तक विभिन्न स्थानों पर सरकार के पुतले दहन और 6 मार्च को हरिद्वार में गंगा तट पर ‘बुद्धि-शुद्धि यज्ञ’ आयोजित करने की घोषणा की गई है। मंच ने कहा कि जब तक संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

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