भगवान श्रीकृष्ण के ही स्वरूप हैं गिरिराज गोवर्धन : भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी

उत्तर प्रदेश राज्य

(डॉ. गोपाल चतुर्वेदी)

वृन्दावन। छटीकरा रोड़ स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में इन दिनों पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर चल रहे अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें प्रख्यात भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी ने अपनी सुमधुर वाणी के द्वारा समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं को पूतना वध, भगवान श्रीकृष्ण के नाम करण, यमलार्जुन उद्धार, माखन चोरी, बकासुर-अघासुर वध, कालिया मर्दन, इंद्र मान मर्दन और गिरिराज गोवर्धन महिमा की कथा श्रवण कराई।
व्यास पीठाधीन भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी ने कहा कि श्रीगिरिराज गोवर्धन का प्राकट्य गोलोक धाम में अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड नायक परब्रह्म परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के वक्षस्थल से हुआ है।इसीलिए वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के ही स्वरूप माने जाते हैं।उनमें और श्रीकृष्ण में कोई भेद नहीं है।वस्तुत: भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति का संरक्षण करने के लिए ही गिरिराज पूजा की लीला की थी।जिससे कि लोग प्रकृति के महत्व को जानें और उसकी उपयोगिताका सही से पालन करें।
उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव भगवान श्रीकृष्ण की एक अलौकिक लीला है।जिसमें एक ओर तो वे गिरिराज गोवर्धन के रूप में स्वयं पूज्य बने और दूसरी ओर उन्होंने नंदनंदन के रूप में ब्रजवासियों के साथ गाते-बजाते हुए गिरिराज गोवर्धन की पूजा-अर्चना की।वस्तुत: यह लीला हमारी पुरातन संस्कृति में निहित अपने आराध्य के प्रति आस्था के अतिरिक्त माधुर्य व वैभव का भी प्रतीक है।
इस अवसर पर गिरिराज गोवर्धन महाराज की अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक झांकी सजाई गई।साथ ही 56 प्रकार के भोग लगाए गए।इसके अलावा गोवर्धन महिमा से ओतप्रोत भजनों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया गया।जिन पर समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
कार्यक्रम में सन्त प्रवर रामदास महाराज (अयोध्या) श्रीकृष्ण कीर्ति पत्रिका के प्रधान संपादक, वरिष्ठ साहित्यकार एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सतेन्द्र कुमार जोशी, आचार्य अंकित कृष्ण महाराज, महोत्सव के मुख्य आयोजक दीपक लोहिया, श्रीमती नूपुर लोहिया, हरि नारायण अग्रवाल ,अशोक अग्रवाल, प्रहलाद गुप्ता, उमेश बंसल, नीरज मित्तल, शशिकांत दुबे, आर. के. श्रोत्रिय, गणेश अग्रवाल, रवि अग्रवाल, राधारानी अग्रवाल, उर्मिल बंसल, ममता सैनी, गोपिका शर्मा, ओमप्रकाश अग्रवाल, नीरज मित्तल एवं आचार्य बृजेन्द्र तिवारी आदि की उपस्थिति विशेष रही।

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