महानारायण तेल से लेकर नदी स्वेदन तक!
कंधे का दर्द और जकड़न जिसे चिकित्सा भाषा में फ्रोजन शोल्डर कहा जाता है, आजकल सिर्फ बुजुर्गों में नहीं, बल्कि युवाओं और मध्य आयु वर्ग में भी तेजी से बढ़ रहा है। आधुनिक चिकित्सा में इसे Adhesive capsulitis कहा जाता है, जबकि आयुर्वेद में ऐसे अवबाहु शूल संकोच के लक्षणों से जोड़ा जाता है। यह समस्या कंधे की गति को सीमित कर देती है, जिससे हाथ ऊपर उठाना, पीछे ले जाना या कपड़े पहने तक मुश्किल हो जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह रोग मुख्यतः वात दोष की वृद्धि से होता है। जब शरीर में वात का असंतुलन होता है, तो जोड़ो, मांसपेशी और स्नायु में सूखापन, जकड़न और दर्द बढ़ जाता है।
इसके कुछ प्रमुख कारण है:-
१) अत्यधिक वातवर्धन आहार- सूखा, तला भुना ,अधिक ठंडा या बासी भोजन।
२) अत्यधिक परिश्रम या अचानक भारी वजन उठाना।
३) लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना,कंप्यूटर /लैपटॉप पर काम करने वालों में सामान्य।
४) पुरानी चोट या सर्जरी के बाद निष्क्रियता।
५) मधुमेह फ्रोजन शोल्डर को बड़ा कारण।
६) ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आना -वात को बढ़ाता है।
लक्षण –
कंधे में धीरे-धीरे बढ़ता हुआ दर्द।
हाथ उठाने और घूमने में कठिनाई।
दर्द के साथ मांसपेशियों में जकड़न।
नींद में परेशानी- रात में दर्द बढ़ जाना।
कपड़े पहने, बाल बनाने या पीठ खुजलाने में असमर्थता।
आयुर्वेदिक उपचार पद्धति-
आयुर्वेदिक में इसका उपचार मुख्यतः वातशामन और स्नायु पोषण पद्धति में किया जाता है।
अभ्यंग (तेल मालिश)
महानारायण तेल, दशमूल तेल या बालाश्रगंधा तेल से हल्की गुनगुना मालिश।
सुबह शाम 5:10 मिनट हल्के हाथ से मालिश करने से रक्त संचार बढ़ता है और स्नायु शिथिल ल होती है।
स्वेदन (स्टीम थेरेपी)
नाडी स्वेदन या पट्टी स्वेदन से कंधे पर गर्म भाप देना।
यह जकड़न खोलना है और दर्द कम करता है।
औसत सेवन –
अश्वगंधा चूर्ण-3-5 ग्राम दूध के साथ, सुबह शाम।
रास्नादि क्वाथ- वातशामक और सूजन नाशक।
योगराज गुग्गुल – जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभकारी।
पंचकर्म –
पिचु- गुनगुना औषधि तेल का कंधे पर स्थापन।
बस्ती (कटी या अंश बस्ती)-स्नायु व जोड़ों की मजबूती के लिए।
घरेलू उपाय:-
१) गर्म सेंक – रुई के कपड़े में नमक भरकर गर्म करके कंधे पर 10 मिनट तक सेंक दें।
२) मेथी और हल्दी का दूध- मेथी दाना एक चम्मच और हल्दी आधा चम्मच दूध में उबालकर पिए, यह सूजन कम करता है।
३) अदरक का सेवन- अदरक चाय या भोजन में अदरक से रक्त संचार बेहतर होता है।
४) गिलोय का रस- 15 20 ml सुबह खाली पेट, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और सूजन घटाने के लिए।
५) हल्के व्यायाम- पेंडुलम एक्सरसाइज ,हल्की स्ट्रेचिंग।
६) गर्म पानी से स्नान- स्नायु और मांसपेशियों की चक्रण को कम करता है।
सावधानियां-
दर्द के समय भारी वजन न उठाएं।
अचानक झटका देने वाली गतिविधियों से बचे।
लंबे समय तक ठंड में बिना ऊनी कपड़े के न रहे।
अंतिम संदेश:-
फ्रोजन शोल्डर कोई अचानक होने वाला रोग नहीं है, बल्कि शरीर में लंबे समय से हो रहे वात संतुलन का संकेत है। आयुर्वेद का केवल इसका प्राकृतिक इलाज करता है, बल्कि भविष्य में दोबारा होने से भी रोकता है। बस, सही आहार, नियमित व्यायाम और गर्माहट बनाए रखना आपकी सबसे बड़ी ढाल है।
Health is wealth
मीना अग्रवाल
आगरा
