मनुष्य जीवन आनंद लेने के लिए है,टेंशन लेने के लिए नही है-इंजीनियर लख्मीचंद यादव
क्यूंकि टेंशन मजबूत से मजबूत मनुष्य के जीवन को भी नरक बनाकर खाक कर देती है,इसलिए मनुष्य को कभी भी टेंशन नही लेनी चाहिए।सन 1994 में की बात है एक हिस्ट्रीशीटर बदमास के कत्ल का झूठा इल्जाम एक बड़े आदमी द्वारा मुझपर मढवा दिया गया और हम पैर फटकार के अपने घर नींद में सो रहे थे जबकि हमारी मां का रौ-रौ कर बुरा हाल हो गया हमने मां से कहा मां आप भी सो जाओ हम सुबह मामले को “finish” कर देंगे, लेकिन फिर भी मेरी मां मेरी टेंशन में पूरी रात नही सोई।
हम सुबह नहा धोकर कत्ल का झूठा इल्जाम लगाने वाले भामाशाहों के घर पहुचे और उन्हें हम शाम तक का अल्टीमेटम दे आए की यदि हमारा नाम आज मर्डर केश फाइल से नही हटा तो कल से ही तुम सबकी बुरी सामत आ जायेगी इसलिए यदि तुम लोग अपनी खैरियत चाहते हो तो पुलिस थाने जाकर मेरा नाम मर्डर केस से हटवा दो नही तो में आप सबकी जिंदगी को नरक बना दूंगा आप जानते भी है में कैसा हूं मेरी धमकी के बाद मेरा नाम उसी दिन पुलिस फाइल से हटवा दिया गया।इस तरह की ओर भी हमारी जिंदगी में केई बड़ी टेंशन हमको मिली पर हंसते खेलते ही हमने उनको Finish कर दिया हमने कभी भी टेंशन को अपने नजदीक नही आने दिया।
हर मनुष्य के शरीर के अंदर 99% बीमारियां सिर्फ और सिर्फ टेंशन की वजह से ही आती है टेंशन ही 100 बीमारियों की जड़ है टेंशन के कारण ही मनुष्य कमजोर होता है और टूटता बिखरता है और जो मनुष्य कभी टेंशन नही लेता ना तो उसके पास कभी बीमारी आती है ना वो कभी कमजोर होता है।ब्रेन हेमरेज,ब्लड सुगर,माई ग्रेन,पेरलाइज,हार्ट अटैक ब्लड प्रेशर जैसी घातक बीमारियां मनुष्य की खुद की टेंशन की वजह से जन्म लेती है।
जिनके दिमाग की घड़ी एकदम ठीक होती है,और जो रात को अपनी दिमाग की घड़ी के सेट समय अनुसार गहरी नींद से जग जाए,और जिस मनुष्य को बेड/चारपाई पर लेटते ही तुरन्त नींद आ जाए वोही किरण कनोजिया,प्राची यादव और मनीष कौरव की तरह दिव्यांग होकर भी इतिहास रचते है।
दोस्तो 41 वर्षो से लग रही ठोकरों ने आज हमको इतना मजबूत बना दिया है हम अपनी बड़ी से बड़ी छति हो जाने पर भी कभी टेंशन नही लेते हमे पता है विधि के विधान को कोई नही पलट सकता जो ऊपर वाले ने भाग्य में लिखा है वो हर हाल में होना ही है तो बताओ फिर हम टेंशन क्यों ले?? टेंशन ना लेने की वजह से ही आज हम यहां है हम टेंशन लेते तो कही और जगह होते यहां नही होते।
