असली और तथाकथित पत्रकारों के बीच पिसती सियासत
तथाकथित पत्रकारों के संरक्षण में खुलेआम गांजा, चरस की तस्करी,अच्छे पत्रकारों की हो रही किरकिरी
नोएड़ा/गाजियाबाद:-पुलिस के तमाम दावों के बाद भी यूपी के गाजियाबाद ,नोएड़ा में नशे का अवैध कारोबार हो रहा है। यहां तक कि झुग्गी झौंपड़ी से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम अवैध तरीके से गांजे की बिक्री हो रही है।यह नजारा न केवल नशे के व्यापार की गंभीरता को दर्शाता है,बल्कि यह भी साफ करता है कि किस तरह शहर के युवाओं को खुलेआम बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है।नोएड़ा /गाजियाबाद शहर सहित देहात की गलियों में बिक रहा गांजा युवाओं की जिंदगी तबाह कर रहा है ।लेकिन यह सब दलाल किस्म के पत्रकारों की देख रेख में हो रहा है ,दिन रात कथित पत्रकार गांजा बिकवा रहे हैं ,गांजा माफियाओं को पुलिस से बचाने का भरोसा देते हैं और महीनेदारी वसूलते हैं ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार,नोएड़ा/गाजियाबाद में गांजा तस्करी बहुत ही बड़े स्तर पर हो रही है।इस व्यापार को धड़ल्ले से चलाने के लिए गांजा तस्करों को अब कथित पत्रकार खुलेआम संरक्षण दे रहे हैं।इस कारण शहर एंव देहात में जगह जगह खुलेआम पुलिस प्रशासन के आंख के नीचे गांजे की बिक्री हो रही है ।लेकिन पुलिस प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका में मशरूफ है ।यही वजह है कि गांजे का अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं ।
कथित पत्रकारों के संरक्षण में गांजा तस्करी
अक्सर देखा जाता है कि नशे के आदी व्यक्ति कहीं भी चिलम सुलगाने लगते है। चाहे वह सार्वजनिक स्थान हो या फिर खुला मैदान, इतना ही नही इस तरह का नशा करने वाले लोग सड़क के किनारे भी बैठ कर चिलम चढ़ाने लगते हैं ।इस तरह क्षेत्र का माहौल भी खराब होता है ।लेकिन गाजियाबाद,नोएड़ा में अधिकतर गांजा की तस्करी कथित एंव दलाल किस्म के पत्रकारों के संरक्षण में हो रही है ।दलाल किस्म के पत्रकार गांजा तस्करों से महीनेदारी लेकर उन्हें बचाने का हर सम्भव प्रयास में लगे रहते हैं ।इसी कारण भी नोएड़ा में गांजा तस्करों के हौसले बुलंद हैं ।इसके साथ साथ नोएड़ा ,गाजियाबाद में जितने भी अवैध कार्य होते हैं उन सभी कार्यों में दलाल किस्म के पत्रकारों की संलिप्तता पाई जाती है ,यह कथित पत्रकार खुलेआम महीनेदारी लेकर अवैध कार्य कराते हैं ।लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन है इसका कारण यह भी स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है।
पत्रकारिता का पवित्र पेशा कलंकित
पत्रकारिता कलम बुद्धिजीवी के हाथ में रहे तो देश में विकास की क्रांति ला सकती है। वही कलम अगर गलत लोगों के हाथ में लग जाए देश में अलगाववाद भ्रष्टाचारी चरम पर पहुंच जाएगी आज के समय में वही हो रहा यह बढ़ती हुई बेरोजगारी के कारण यूवा पीढ़ी गलत दिशा की ओर भटक गई अपने मिशन से हटकर देश और समाज के लिए घातक हो रही है,इसी प्रकार नोएड़ा गाजियाबाद की पत्रकारिता भी खतरे में है यहां दलाल किस्म के पत्रकारों ने पत्रकारिता को पूरी तरह से कलंकित कर दिया है ।इन दोनों शहरों में दलाल किस्म के पत्रकार खुलेआम सभी अवैध कार्य करा रहे हैं ।गांजा ,सट्टा, चरस , हुक्का बार में नशीले पदार्थ का सेवन स्पा में सेक्स रैकेट सहित जो भी अवेध कार्य इन दोनों शहरों में हो रहे है वह सब कथित पत्रकार करा रहे हैं ,लाखों रुपए की महीनेदारी के कारण पत्रकारों ने अपनी कलम को गिरवीं रख दिया है ।गांजा माफिया रोजाना इन दलालों के संरक्षण में कुंतल के हिसाब से रोज़ाना गांजा बेच रहे हैं ।इनके कारण युवाओं का भविष्य खतरे में है ।युवाओं की जिंदगी में नशा घोला जा रहा है लेकिन अधिक कमाई होने के कारण इन अवैध कार्य पर अंकुश लगाना असंभव है ।लेकिन इसके साथ साथ वर्तमान पत्रकारिता भी दलाल किस्म के पत्रकारों के कारनामों के कारण खतरे में है ।
प्रतिमाह लाखों रूपए का अवैध कारोबार
नोएड़ा/गाजियाबाद में पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं करने से गांजे के कारोबारी बेखौफ होकर खुलेआम नशे के नाम पर मौत की पुडिया बेच रहे है। एक अनुमान के मुताबिक शहर व शहर से लगे आस-पास के देहात इलाकों में प्रतिमाह लगभग 20-30 लाख रुपये की गांजे की बिक्री हो रही है जिसकी दो ही वजह संभव है या तो गांजे का अवैध कारोबार पुलिसिया संरक्षण में फल-फूल रहा है या फिर पुलिसिया खुफिया तंत्र को गांजे के अवैध कारोबार के विषय में कोई इनपुट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में दोनों ही स्थितियों को शहर के हित नहीं माना जा सकता है।साथ ही दलाल किस्म के पत्रकार भी गांजा तस्करी के मुख्य रूप हैं ।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कब तक इन दलाल किस्म के पत्रकारों पर शिकंजा कसा जाएगा और गांजा माफियाओं पर कार्यवाही होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
