शराब की ओवर रेट ने पैदा कर दिए हैं सैकड़ों दलाल किस्म के पत्रकार
आबकारी विभाग द्वारा नहीं की जा रही है ओवर रेट शराब बेचने वालों पर कार्यवाही
पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं दलाल किस्म के पत्रकार
नोएड़ा गाजियाबाद में बुरा हाल,शराब माफिया दिन रात कर रहे हैं कमाल
नोएड़ा/गाजियाबाद:-आबकारी विभाग चाहे कितना ही दावा करे कि शराब के ठेकों पर ग्राहकों से ओवर रेट नहीं वसूला जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। शायद ही कोई ऐसा ठेका होगा, जहां पर दारू ओवर रेट न बेची जा रही हो।
इसी प्रकार नोएड़ा गाजियाबाद में शराब दुकानों से ओवर रेट की शिकायतें थम नहीं रही हैं। अधिकांश दुकानों में देशी-विदेशी मदिरा एमआरपी के अलावा बढ़ी हुई कीमतों में बेची जा रही है। देशी मदिरा की बिक्री में तो चिल्लर की किल्लत का बहाना बना रहे हैं। वहीं विदेशी मदिरा की कीमत में दुकानदार की मनमर्जी चल रही है। आलम यह है कि अधिकतर शिकायत के बाद भी ओवररेट बिक्री नहीं रुक रही है। बता दें कि इन दोनों शहरों में शराब बिक्री में ओवर रेट की शिकायत पुरानी ही है।इन दोनों शहरों में ओवर रेट शराब बिकने के कारण सैकड़ों दलाल किस्म के पत्रकार भी पैदा हो गए हैं ।उनकी पत्रकारिता केबल शराब की दुकानों पर ही चलती हुई नजर आ रही है ।दिन भर ओवर रेट शराब बेच रहे सेल्समेनों की दलाल किस्म के पत्रकार वीडियो बनाते हैं और वीडियो ट्वीट कर सेल्समेनों से अवैध वसूली करते हैं ।
जीएम इंचार्ज व आबकारी अधिकारी भी निभाते हैं ट्वीट डिलीट गैंग से रिश्तेदारी
नोएड़ा गाजियाबाद में पत्रकारिता का इस समय बुरा हाल है।शराब की ओवर रेटिंग के कारण पैदा हुए सैकड़ों दलाल किस्म के पत्रकार यहीं से अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं ।यह दलाल किस्म के पत्रकार सुबह गैंग बनाकर घर से निकलते हैं और अलग क्षेत्रों में रोजाना बट जाते हैं उसके बाद शराब की दुकानों पर पहुंचते हैं और ओवर रेट शराब बेच रहे सेल्समेनों की वीडियो बना लेते हैं उसके बाद वीडियो को ट्वीट (एक्स) कर देते हैं और उसके बाद सेल्समैन के पास जाकर उससे सौदेबाजी करने लग जाते हैं और सेल्समेन कार्यवाही के डर से रुपए दे देते हैं और ट्वीट को दलाल किस्म के पत्रकार से डिलीट करा देते हैं ।इस प्रकार नोएड़ा गाजियाबाद में ट्वीट डिलीट गैंग का आतंक चरम सीमा पर है ।
इस गैंग पर शराब की दुकानों के इंचार्ज जीएम एंव स्वयं आबकारी अधिकारी भी मेहरबान है ।इस गैंग पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर सकता है क्योंकि जिम्मेदारों द्वारा इस गैंग से खूब रिश्तेदारी निभाई जा रही है ।इस गैंग की सैकड़ों ट्विटर आईडी है लेकिन फिर भी इस गैंग की कभी कोई उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई है ।इस गैंग के कारनामों के कारण पत्रकारिता कलंकित हो रही है ।इसके साथ ही
शराब की कालाबजारी भी अधिकारियों के संज्ञान में है लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्यवाही शराब माफियाओं पर नहीं हो रही है।खुलेआम माफिया रोजाना ग्राहकों की जेब पर डाका डालकर अपने काले कारनामों को कर रहे हैं ।सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ है कि शराब की कालाबजारी की महीनेदारी भी आबकारी विभाग के अधिकारियों पर पहुंचती है ।इस कारण आबकारी विभाग की कार्यवाही करने वाली कलम पूरी तरह बन्द है ।
