भारत में तेजी से बढ़ रहे अग्न्याशय रोग पैनक्रियाटाइटिस के मामले, युवाओं में भी बढ़ी चिंता

उत्तराखंड राज्य

गदरपुर। देश में अग्न्याशय से जुड़ी गंभीर बीमारी पैनक्रियाटाइटिस के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है, जो चिंता का विषय बनती जा रही है।
पद्मश्री वैध बालेंदु प्रकाश ने बताया कि उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में भारत में पैनक्रियाटाइटिस के लगभग 5 लाख 23 हजार नए मामले सामने आए। चिकित्सकों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, अत्यधिक तली-भुनी चीजों का सेवन, शराब और तनाव जैसी वजहें इस बीमारी के बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।पैनक्रियाटाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें अग्न्याशय (पैंक्रियास) में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम और रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने वाला हार्मोन इंसुलिन बनाता है। जब इस अंग में सूजन आती है तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने बताया के पैनक्रियाटाइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस, जिसमें अचानक तेज सूजन और पेट के ऊपरी हिस्से में गंभीर दर्द होता है तथा कई बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है। दूसरा क्रॉनिक पैनक्रियाटाइटिस, जो लंबे समय तक रहने वाली समस्या है और इससे अग्न्याशय को स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है। इस स्थिति में मरीज को लगातार दर्द, अपच और वजन कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश के अनुसार पैनक्रियाटाइटिस के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में स्पष्ट वृद्धि देखी जा रही है। उनका कहना है कि यह बीमारी अब पहले की तुलना में अधिक जटिल रूप में सामने आ रही है और युवाओं में भी इसके मामले बढ़ना चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि पड़ाव स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर में पैनक्रियाटाइटिस से पीड़ित 2500 से अधिक रोगियों का उपचार किया जा चुका है। इन मामलों के अध्ययन से इस रोग के कारणों, लक्षणों और उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि पैनक्रियाटाइटिस के प्रमुख लक्षणों में पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, मतली या उल्टी, भोजन के बाद दर्द बढ़ना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
उन्होंने सलाह दी है कि इस बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। जागरूकता और शुरुआती स्तर पर सही इलाज से पैनक्रियाटाइटिस की जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *