बसपा का बड़ा प्लान, यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग पर दांव

राजनीति

बसपा पिछले 13 सालों से सत्ता से बाहर है। यूपी विधानसभा चुनाव-2027 में बसपा सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। विधानसभा चुनाव से पहले बसपा पंचायत चुनाव में बड़ा दांव चलने जा रही है।

यूपी में सियासी फलक पर कमजोर आंकी जाने लगी बहुजन समाज पार्टी (BSP) को उम्मीद है कि मिशन-2027 फतह को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कामयाबी हासिल करना जरूरी है, ताकि सूबे में 13 साल से सत्ता का सूखा खत्म हो सके। पंचायत चुनाव जीतने से पार्टी को सियासी ऑक्सीजन मिलेगा। पार्टी थिंक टैंक ने इसके लिए खास रणनीति भी बनाई है।

सियासी जमीन मजबूत करने के लिए दलितों के साथ पिछड़ों और अति पिछड़ों को साधने के लिए संगठन की टीम जुट गई है। पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का प्लान भी बसपा का है।

दरअसल, सोशल इंजीनियरिंग से सत्ता पर काबिज हो चुकी बसपा ने विधानसभा चुनाव-2027 के लिए पिछड़ा वर्ग पर दांव लगाया है। इसका रिहर्सल पंचायत चुनाव में होगा। पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियों को पंचायत चुनाव में प्राथमिकता दी जाएगी। मूल वोट बैंक के साथ पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम वोट से सत्ता में वापस लौटने के लिए बसपा ने बूथ स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है।

रणनीति के तहत जिला संगठन में फिलहाल हर जिले में पिछड़े और अति पिछड़े समाज के सदस्यों को जोड़ने का काम तेज कर रखा है। संगठन लोगों को समझाने के लिए बता रहा है कि प्रदेश में मायावती की हर सरकार के रहते पिछड़ों और अति पिछड़ों के काम ज्यादा हुए। सरकारी योजनाओं का लाभ मिला।

बसपा के एक मंडल कोऑर्डिनेटर का कहना है कि लंबे वक्त पिछड़े और अति पिछड़े बसपा के साथ मजबूती से खड़े रहते थे, लेकिन बीते दो-तीन चुनाव से उनका झुकाव बीजेपी और सपा की तरफ बढ़ा है। बसपा इन वोटरों को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में साधकर 2027 में सूबे की सियासत में वापसी की संभावना बसपा थिंक टैंक देख रहा है। इस पदाधिकारी की मानें तो संगठन का मानना है कि अगर पिछड़े और अति पिछड़े एकजुट करने में बसपा को कामयाबी मिल जाती है, तब पार्टी एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में कामयाब होकर सत्ता हासिल कर सकती है।

पार्टी का मानना है कि दलित में अभी दूसरे सियासी दल बड़ी सेंध नहीं लगा सके हैं। मुस्लिमों का छिटका एक बड़ा हिस्सा भी बसपा में आसानी से वापस आ सकता है। पार्टी का यह भी मानना है कि पार्टी नेता और मायावती के भतीजे आकाश आनंद की सक्रियता फिर से बढ़ने के कारण युवाओं का जुड़ाव भी बसपा से बढ़ रहा है।

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