नैनीताल में ओम बिरला का संदेश: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

उत्तराखंड राज्य

नैनीताल के सुरम्य वातावरण में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन की महत्ता पर विशेष बल दिया। बुधवार को आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकारी तंत्र, पंचायती राज संस्थाएं, वन पंचायतें और आम नागरिक एक सूत्र में नहीं बंधेंगे, तब तक पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अधूरा रहेगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक आपदाओं से निपटने के लिए ‘पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली’ को एकमात्र समाधान बताया।

डॉ. रघुनंदन सिंह टोलिया प्रशासनिक अकादमी में स्थानीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने उत्तराखंड की वन पंचायतों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये पंचायतें न केवल वनों का संरक्षण कर रही हैं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को भी धरातल पर उतार रही हैं। लोक सभा अध्यक्ष ने इन जमीनी संस्थाओं को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे सशक्त कड़ी करार दिया, जो सुशासन और प्रकृति के बीच सेतु का कार्य करती हैं।

श्री बिरला ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को केवल एक संवैधानिक आवश्यकता नहीं, बल्कि हर नागरिक का सामूहिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इस बात का प्रमाण है कि मानव और प्रकृति कैसे सामंजस्य के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं। वृक्षों और जल स्रोतों के प्रति यहाँ की श्रद्धा आज की आधुनिक दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

औपनिवेशिक काल का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे स्थानीय समुदायों ने वन संसाधनों के दोहन के विरुद्ध प्रतिरोध की मशाल जलाई थी। 1930 के दशक से शुरू हुए वन अधिकारों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोर दिया कि अब समय उन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का है। उन्होंने प्रशासन और प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे वन संरक्षण की राह में आने वाली शेष चुनौतियों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली) का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि उत्तराखंड का वन पंचायत मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है। विशेष रूप से वनों के संरक्षण में महिलाओं की अटूट भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और प्रकृति प्रेम का अद्भुत मेल बताया।

योग और आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता पर चर्चा करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने भविष्य की एक स्पष्ट कार्ययोजना का खाका खींचा। उन्होंने वन पंचायतों के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती, उनके वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन), गहन शोध और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ उनके एकीकरण पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधियों ने वनाग्नि की रोकथाम, संस्थागत मजबूती और वित्तीय व तकनीकी सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव और चुनौतियां भी साझा कीं।

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