सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में दो उपनिरीक्षक निलंबित, पूरा पुलिस स्टाफ लाइन हाजिर

उत्तराखंड

रुदपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “कानून-व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता” के स्पष्ट संदेश के अनुरूप जनपद उधमसिंहनगर में पुलिस तंत्र के भीतर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लिया गया है। मृतक सुखवन्त सिंह पुत्र तेजा सिंह, निवासी ग्राम पैगा, कोतवाली आईटीआई से जुड़े प्रकरण में गंभीर लापरवाही और उदासीनता सामने आने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर मणिकांत मिश्रा ने त्वरित और कठोर कार्रवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, ढिलाई या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। इसी क्रम में कोतवाली आईटीआई में तैनात दो उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है तथा चौकी पैगा पर तैनात पूरे पुलिस स्टाफ को लाइन हाजिर किया गया है।

उन्होंने कहा कि लापरवाही के आरोपों के दृष्टिगत उपनिरीक्षक ना0पु0 कुन्दन सिंह रौतेला (थानाध्यक्ष, कोतवाली आईटीआई) एवं उपनिरीक्षक ना0पु0 प्रकाश बिष्ट (कोतवाली आईटीआई) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई प्रस्तावित/प्रचलित की गई है।

इसके साथ ही चौकी पैगा, कोतवाली आईटीआई पर नियुक्त उपनिरीक्षक/चौकी प्रभारी जितेन्द्र कुमार, अ0उ0नि0 सोमवीर सिंह, आरक्षी 327 ना0पु0 भूपेन्द्र सिंह, आरक्षी 690 ना0पु0 दिनेश तिवारी, मु0आरक्षी 154 ना0पु0 शेखर बनकोटी, आरक्षी 501 ना0पु0 सुरेश चन्द्र, आरक्षी 392 ना0पु0 योगेश चौधरी, आरक्षी 60 ना0पु0 राजेन्द्र गिरी, आरक्षी 298 ना0पु0 दीपक प्रसाद एवं आरक्षी 159 ना0पु0 संजय कुमार। को निम्न तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस में जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी मामले में लापरवाही, संवेदनहीनता या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख़्शा नहीं जाएगा।

यह कार्रवाई धामी सरकार की उस स्पष्ट नीति को दर्शाती है, जिसमें कानून का राज, जवाबदेही और पीड़ितों को न्याय सर्वोपरि है। सरकार का संदेश साफ़ है- जनता की सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है।

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