उत्तराखंड ऊर्जा निगम विवाद: तकनीकी अर्हता हटाने का निर्णय प्रशासनिक निष्पक्षता के खिलाफ

उत्तराखंड राज्य

देहरादून। जन प्रहार संगठन ने ऊर्जा निगमों में प्रबंध निदेशक (एमडी) पद के लिए तकनीकी अर्हता में किए गए संशोधन को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

संगठन का कहना है कि यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब Uttarakhand High Court ने पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को तकनीकी योग्यता के अभाव में पद से हटाने का आदेश दिया था।

जन प्रहार के अनुसार यदि किसी विशेष व्यक्ति को पद पर बनाए रखने के उद्देश्य से नियमों में परिवर्तन किया गया है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता और सुशासन के सिद्धांतों के विपरीत है।

संगठन का कहना है कि गैर-तकनीकी अधिकारियों को भी एमडी बनने की अनुमति देने का निर्णय कई आशंकाओं को जन्म देता है, खासकर तब जब न्यायालय तकनीकी योग्यता को आवश्यक मान चुका है।

मामले में पक्षकार दीप्ति पोखरियाल ने बताया कि 18 फरवरी 2026 के उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न किए जाने के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की गई है, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, ऊर्जा सचिव तथा पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को पक्षकार बनाया गया है।

जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल ने कहा कि उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद भी सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर संबंधित अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रही है और उक्त प्रस्ताव को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सह संयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद नियमों में बदलाव कर अधिकारी को बचाने की कोशिश की जा रही है।

संगठन ने मांग की है कि ऊर्जा निगमों के एमडी पद के लिए तकनीकी अर्हता हटाने के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए, पात्रता संशोधन और नियम परिवर्तन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया तथा फाइल नोटिंग सार्वजनिक की जाए तथा भविष्य में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति के लिए पारदर्शी और मेरिट आधारित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

जन प्रहार का कहना है कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में ऊर्जा क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है और शीर्ष पदों पर नियुक्ति योग्यता, अनुभव और पारदर्शिता के आधार पर ही होनी चाहिए।

संगठन ने प्रदेश सरकार से पूरे मामले में तथ्य सार्वजनिक करने और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात या भ्रष्टाचार की आशंका को समाप्त किया जा सके।

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