ब्रेन-हेमरेज, ब्रेन-स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) अर्थात दिमाग़ की नस का फटना।
सूरज गुप्ता/ सिद्वार्थनगर।
एक पार्टी चल रही थी, एक महिला को थोड़ी ठोकर सी लगी और वह गिरते गिरते संभल गयीं, मगर उसने अपने आस-पास के लोगों को यह कहकर आश्वस्त कर दिया कि “सब कुछ ठीक है, बस नये बूट की वजह से एक ईंट से थोड़ी ठोकर लग गयीं थी।”(यद्यपि आस-पास के लोगों ने ऐम्बुलेंस बुलाने की पेशकश भी की…) साथ में खड़े मित्रों ने उन्हें साफ होने में मदद की और एक नई प्लेट भी आ गयीं। ऐसा लग रहा था कि महिला थोड़ा अपने आप में सहज नहीं है। उस समय तो वह पूरी शाम पार्टी एन्जॉय करती रहीं, पर बाद में उसके पति का लोगों के पास फोन आया कि उसे अस्पताल में ले जाया गया, जहां उस महिला ने उसी शाम दम तोड़ दिया। दरअसल उस पार्टी के दौरान महिला को ब्रेन-हैमरेज हुआ था। अगर वहां पर मौजूद लोगों में से कोई इस अवस्था की पहचान कर पाता तो आज वो महिला हमारे बीच जीवित होती। माना कि ब्रेन-हैमरेज से कुछ लोग मरते नहीं है, लेकिन वे सारी उम्र के लिये अपाहिज़ और बेंबसी वाला जीवन जीने पर मजबूर तो हो ही जाते हैं।
स्ट्रोक की पहचान –
बामुश्किल एक मिनट का समय लगेगा, आईयें जानते हैं
न्यूरोलॉजिस्ट क्या कहते हैं? अगर कोई व्यक्ति ब्रेन में स्ट्रोक लगने के तीन घन्टे के अन्दर अगर उनके अर्थात
न्यूरोलॉजिस्ट डाक्टर के पास पहुंच जायें तो स्ट्रोक के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त (reverse) किया जा सकता है। उनका मानना है कि सारी की सारी ट्रिक बस यही है कि कैसे भी स्ट्रोक के लक्षणों की तुरन्त पहचान होकर मरीज़ को जल्द से जल्द (यानि तीन घन्टे के अन्दर) डाक्टरी चिकित्सा मुहैया हो सकें और बस दुःख इस बात का ही है कि अज्ञानतावश यह सब ही एक्ट्यूट (execute) नहीं हो पाता है। मस्तिष्क के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक के मरीज की पहचान के लिए तीन अति महत्वपूर्ण बातें जिन्हें वे एसटीआर (STR) कहते हैं, सदैव ध्यान में रखनी चाहिए। अगर एसटीआर (STR) नामक ये तीन बातें हमें मालूम हों तो मरीज़ के बहुमूल्य जीवन को बचाया जा सकता है।
ये तीन बातें इस प्रकार हैं –
1. S = Smile अर्थात उस व्यक्ति को मुस्कुराने के लिये कहिए।
2. T = Talk अर्थात उस व्यक्ति को कोई भी सीधा सा एक वाक्य बोलने के लिये कहें, जैसे- ‘आज मौसम बहुत अच्छा है’ आदि।
3. R = Raise अर्थात उस व्यक्ति को उसके दोनों बाजू ऊपर उठाने के लिए कहें।
अगर उस व्यक्ति को उपरोक्त तीन कामों में से एक भी काम करने में दिक्कत है, तो तुरन्त ऐम्बुलेंस बुलाकर उसे न्यूरो चिकित्सक के अस्पताल में शिफ्ट करें और जो आदमी साथ जा रहा है, उसे इन लक्षणों के बारें में बता दें ताकि वह पहले से ही डाक्टर को इस बाबत खुलासा कर सकें। इनके अलावा स्ट्रोक का एक लक्षण यह भी है कि उस आदमी को अपनी जीभ बाहर निकालने को कहें। अगर उसकी जीभ सीधी बाहर नहीं आकर, एक तरफ मुड़ सी रही है, तो यह भी ब्रेन-स्ट्रोक का एक प्रमुख लक्षण है।
एक सुप्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर इस मैसेज़ को पढ़ने वाला, इसे ज्यादा नहीं तो आगे कम से कम अगर दस लोगों को भी भेजें, तो निश्चित तौर पर कुछ न कुछ बेशकीमती “जानें” तो बचाई ही जा सकती हैं।
