थायराइड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यंत्रों के दोनों ओर दो भागों में पाई जाती है। थायराइड ग्रंथि के ठीक से कम न करने पर रक्त में थायराँक्सिन नमक हार्मोंस का स्तर प्रभावित होता है। इस तकलीफ के होने पर तीन योगासन को करने से राहत मिल सकती है।
१) सर्वांगासन:- जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को आपस में मिलाकर कमर तक के भाग को जमीन से ऊपर उठाते हुए लाएं। उसके बाद दोनों हाथों के सहारे से कमर को पकड़ ले। पंजे खींचते हुए, जांघों और पैरों को बिल्कुल सीधा रखें। इस दौरान ठोढ़ी गले से लग रहे और पर 90 डिग्री के कोण पर हो। सांसों की गति सामान्य रखें। जितनी देर तक सरलता पूर्वक आसन रह सके करते रहे। फिर धीरे-धीरे हाथों के सहारे से सामान्य अवस्था में वापस आए।
फायदा:-
१) वजन को नियंत्रित रखता है।
२) बालों को गिरने से रोकता है।
३) झूरियां पिंपल्स और बढ़ती उम्र के असर को काम करता है।
२) उष्ट्रासन:- फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाए या व्रजासन में बैठे। ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें पंजे पीछे की ओर हो तथा फर्श पर जम रहे। घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फीट की दूरी रखें। अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए पीछे की ओर झुके और आप दाईं हथेली को दाएं एड़ी पर तथा बाएं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें। ध्यान रहे कि पीछे झुकता समय गर्दन को झटका ना लगे। अंतिम मुद्रा में जांघें फर्श पर समकोण बनाती हुई हो और सर पीछे की ओर झुका हुआ रखें। इस दौरान शरीर का वजन बाहों तथा पैरों पर समान रूप से होना चाहिए। इस आसन को करते हुए धीरे-धीरे सांस ली और छोड़ें। जब तक हो सके अपने हिसाब से इस मुद्रा में मेंटेन करें। अब लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में है। यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप इसको 5 से 7 बार कर सकते हैं।
फायदा:-
१) क्रोध दूर करने में मददगार है।
२) मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है।
३) थायराइड के अलावा डायबिटीज में भी फायदेमंद है।
३) मत्स्यासान:- इसे करने के लिए पद्मासन में बैठ जाएं। धीरे-धीरे पीछे झुके और पूरी तरह से पीठ पर लेट जाएं। अब बाएं पैर को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पैर को बाएं हाथ से पकड़ ले। कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दे। इस दौरान घुटने जमीन से सटे होने चाहिए। सांस लेते हुए सर को पीछे की ओर लेकर जाएं। आप हाथ की सहायता से भी अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं। इस दौरान धीरे-धीरे सांस ले और छोड़ें। इस अवस्था को अपने हिसाब से मेंटेन करें। फिर तथा सांस छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था आएं। वह एक चक्र हुआ। इसी तरह 3 से 5 चक्र करें।
फायदा:-
१) यह पराँक्सिन हार्मोंस के साथ में मदद करता है।
२) कब्ज के उपचार में लाभदायक है।
३) वौन विकारों से बचाने में इफेक्टिव है।
Health is wealth
मीना अग्रवाल
आगरा
