नैनीताल का एपण अब बनेगा वैश्विक पहचान, ODOP से महिलाओं को मिलेगा रोजगार

उत्तराखंड राज्य

नैनीताल। कुमाऊं की पारंपरिक लोककला ‘एपण’ (Aipan Art) को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के लिए नैनीताल जिले में इसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत चुना गया है। कभी केवल मांगलिक अवसरों पर घरों की देहरी और आंगन तक सीमित रहने वाली यह लाल और सफेद रंगों की पावन कला अब आधुनिक उत्पादों का हिस्सा बनकर स्थानीय कारीगरों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त जरिया बन रही है।

क्यों चुना गया एपण को ओडीओपी में?

एपण केवल एक चित्रकला नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की आत्मा है। लाल मिट्टी (गेरू) की पृष्ठभूमि पर चावल के आटे (बिस्वार) से उकेरे जाने वाले ज्यामितीय पैटर्न, देवी-देवताओं के पीठ और स्वास्तिक इसके मुख्य आधार हैं। नैनीताल एक बड़ा पर्यटन केंद्र है। ऐसे में यहां आने वाले लाखों पर्यटकों के जरिए इस स्वदेशी हस्तकला को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और खरीदार मिल सकते हैं। इसी व्यावसायिक व सांस्कृतिक क्षमता को देखते हुए इसे ODOP में शामिल किया गया है।

वर्तमान स्थिति और निर्माण का आधुनिक तरीका

नैनीताल जिले के भवाली, भीमताल, रामगढ़ और नैनीताल शहर के आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं। अब पारंपरिक गेरू और बिस्वार के अलावा टिकाऊ रंगों का प्रयोग कर इसे लकड़ी के नेमप्लेट, टी-कोस्टर, चाबी के छल्ले, डायरी कवर, मेजपोश, पूजा की चौकी, फाइल फोल्डर और शॉल-स्कार्फ पर उकेरा जा रहा है। हस्तनिर्मित एपण से सजे ये उत्पाद पर्यटकों के बीच स्मृति चिह्न के रूप में बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं।

कारीगरों की जुबानी: बदल रही है जिंदगी

नैनीताल की स्थानीय एपण कलाकार कविता बिष्ट ने कहा कि पहले हम एपण केवल शुभ कार्यों और त्योहारों पर घर के आंगन में बनाते थे लेकिन जब से इसे सरकार ने बढ़ावा दिया है, हमें नियमित काम मिल रहा है। अब हमारी बनाई नेमप्लेट और टी-कोस्टर दूर-दूर तक जा रहे हैं। इससे हमें घर बैठे 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह की सम्मानजनक आय हो रही है।

सरकार की मदद और प्रोत्साहन

राज्य सरकार और जिला प्रशासन ‘एमएसएमई’ योजना के तहत इन कारीगरों को बहुआयामी सहयोग प्रदान कर रहा है। हस्तशिल्पियों को फिनिशिंग और पैकेजिंग सुधारने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। ‘सरस मेलों’, राष्ट्रीय प्रदर्शनियों और नैनीताल के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर स्टॉल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एपण उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं ताकि वैश्विक स्तर पर ऑर्डर मिल सकें।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एपण कला के संवर्धन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मानिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। नैनीताल की पहचान रही लोककला एपण को ओडीओपी में शामिल करने से हमारी देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर को नया जीवन मिला है। हमारी मातृशक्ति को इस हुनर के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। सरकार एपण कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

एपण का ओडीओपी में चयन होना न केवल एक प्राचीन परंपरा का संरक्षण है, बल्कि यह नैनीताल की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक नई और सुनहरी पटकथा भी लिख रहा है।

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