धर्म में आस्था रखने वाले लोग अक्सर मनोकामना की इच्छा की पूर्ति के लिए परमात्मा वाहेगुरु अल्लाह के आगे विनती प्रार्थना दुआ यानी अरदास करते हैं अरदास एक शक्ति है एक प्रेरणा है सरदार मनजीत सिंह आध्यात्मिक गुरु

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धर्म में आस्था रखने वाले लोग अक्सर मनोकामना की इच्छा की पूर्ति के लिए परमात्मा वाहेगुरु अल्लाह के आगे विनती प्रार्थना दुआ यानी अरदास करते हैं अरदास एक शक्ति है एक प्रेरणा है सरदार मनजीत सिंह आध्यात्मिक गुरु

श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज में आज सम्मानित टीचर को आध्यात्मिक लेक्चर देते हुए सरदार मनजीत सिंह ने अरदास के बारे में विस्तार से बताया इंसान अपनी पीड़ा दर्द दुख सुख शुकराना सभी के लिए अपने परमात्मा वाहेगुरु अल्लाह के आगे अरदास करता है
मनजीत ने कहा कई बार आपको जितना दर्द होता है वह उस ग्रंथि पुजारी या मौलवी को नहीं पता होता आप ग्रंथि पुजारी या मौलवी से इसलिए अरदास करवाते हैं यह परमात्मा की राह चलने वाले व्यक्ति होते हैं
मनजीत ने कहा पीड़ा को देखते हुए उस समय आप खुद अपने परमात्मा के आगे नतमस्तक हो तो आपकी पुकार जल्द सुनी जाती है आपकी पीड़ा का दर्द जल्दी सच्ची दरगाह तक पहुंचता है भले ही आप अनपढ़ हैं मनजीत ने कहा आपको अरदास भी नहीं करनी आती हो फिर भी आपकी पीड़ा भरी आंखें आंसुओं से भीगी आंखें जब शीश झुका कर आप परमात्मा के आगे खड़े होते हैं आप किसी धर्म से हो परमात्मा एक है
मनजीत ने कहा आप मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा जिस धर्म को मानते हैं आप बस विनती करें अरदास करें प्रार्थना या दुआ मांगे वह सब की सुनता है आप जिस धर्म को मानते हैं आप बस अपनी पीड़ा को बताएं
परमात्मा आपके अंग संग रहता है उसे सब पता है अरदास का पहला अक्षर ,अ, है अ ,का अर्थ है ,अंतर्यामी, वह सब जानता है उस से कुछ छुपा नहीं जब आप अरदास करते हैं शीश झुका कर खड़ा होना ही आपकी बात खुद , बेखुद ,पहुंच जाती है
अंतर्यामी आपके दर्द को सुनता है मनजीत सिंह ने कहा अरदास का दूसरा अक्षर, र ,है का अर्थ है रखवाला वह सबका रखवाला है जब वाहेगुरु ने तेरी रक्षा माता के गर्भ में जब तू उल्टा लटका था तब भी तेरी रक्षा की थी
मनजीत ने कहा अब भी तू उस पर भरोसा कर परमात्मा तेरी हर जगह रक्षा करेगा वह अंग संग रहता है
अरदास का तीसरा अक्षर , द, है द का अर्थ है दाता पालनहार जब परमात्मा तेरी मदद माता के गर्भ में करता है तो क्या धरती पर आने के बाद नहीं करेगा
मनजीत ने कहा दाता यानी पालनहार परमात्मा का वायदा है रिजक् देना
मनजीत ने कहा अरदास का आखरी अक्षर है ,स ,अर्थ है स का अर्थ है स्थान देने वाला सहारा देने वाला
मनजीत ने कहां पर परमात्मा अंग संग है जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी स्थान देने वाला है परमात्मा कर मरने के बाद भी आपको स्थान देता है इंसान मारकर कहां गया पता नहीं जला दिया हमने दफना दिया फिर भी हम अरदास करते हैं बिछडी रूह को अपने चरणों में निवास बक्श
मनजीत ने कहा अगर आप परमात्मा की राह चलते हैं तो परमात्मा आपके साथ है दुख सुख में भी आपके साथ है आप कभी अकेले नहीं रहते वह हमेशा आपके साथ रहता है सभी सम्मानित टीचर ने श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक गुरु सरदार मनजीत सिंह का आभार व्यक्त किया
कि समय-समय पर आप हमारे बीच आध्यात्मिक लेक्चर देकर हमारे जीवन को परमात्मा से जोड़ने एवं जीवन की सच्चाई से अवगत कराते हैं ताकि हम बच्चों को भी सही राह दिखा सके आपका लेक्चर हमारा ज्ञान को भी बढ़ाता है

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