चाँदी भस्म पर वैज्ञानिक मुहर: परंपरागत पुट प्रक्रिया से होता है गहरा रासायनिक परिवर्तन

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विशेष रिपोर्ट | वैद्य बालेन्दु प्रकाश, संस्थापक अध्यक्ष, वी सी पी कैंसर रिसर्च फाउंडेशन

बिलासपुर, जिला रामपुर: परंपरागत आयुर्वेदिक विधि से तैयार की जाने वाली चाँदी भस्म को लेकर किए गए एक नवीन वैज्ञानिक अध्ययन में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, भस्म निर्माण की प्रक्रिया केवल धातु को गर्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल रासायनिक और संरचनात्मक परिवर्तन की क्रमिक प्रक्रिया है।

शोध में पाया गया कि प्रारंभिक अवस्था में चाँदी अपने शुद्ध धात्विक रूप में रहती है, जिसमें पारा पूरी तरह मिश्रित नहीं होता। लेकिन जैसे ही पहला पुट दिया जाता है, चाँदी और पारा मिलकर एक स्थिर मिश्रधातु का निर्माण करते हैं।

आगे के पुटों में धीरे-धीरे संरचना में परिवर्तन शुरू होता है। पाँचवें से सातवें पुट के बीच पदार्थ में सूक्ष्म बदलाव देखे गए, जो रासायनिक क्रियाओं की शुरुआत का संकेत देते हैं। आठवें से दसवें पुट के दौरान यह परिवर्तन तेज हो जाता है और गंधक सहित अन्य तत्व इसमें शामिल होने लगते हैं।

ग्यारहवें से तेरहवें पुट के बीच पदार्थ की मूल धात्विक पहचान लगभग समाप्त हो जाती है और नए यौगिक बनने लगते हैं। चौदहवें पुट के बाद यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है, जिसमें चाँदी पूरी तरह एक नई, स्थिर और बहु-घटक संरचना में परिवर्तित हो जाती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि इस अंतिम अवस्था में प्राउस्टाइट और बिलिंग्सलेयाइट जैसे यौगिक प्रमुख रूप से उपस्थित होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि धातु का मूल स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया चाँदी को एक साधारण धातु से बदलकर सुरक्षित और प्रभावी औषधीय रूप में परिवर्तित करती है। यह अध्ययन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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