लक्स जैसी खुशबू हमाम में नहीं और हम जैसे दलाल पूरे हिंदुस्तान में नहीं-सतीश प्रजापति

नोएडा। गाजियाबाद में पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है हर एक दूसरा व्यक्ति यहां अपने आपको पत्रकार बताता है और अधिकारियों और कर्मचारियों पर अपनी धौस जमाते हुए नजर आता हैं ऐसे तथाकथित लोगों के कारण पत्रकारिता बदनाम हो रही है
ये लोग कोई पत्रकार नहीं है और ना ही पत्रकारिता का अता पता है , हमारे महापुरुषों ने संविधान का निर्माण किया और देश में लागू किया इसके कई अंग बनाए गए जिसमें न्यायपालिका ,कार्यपालिका और विधायिका और चौथा स्तम्भ मीडिया है ।लेकिन कुछ समय से ऐसा लग रहा है कि चौथा स्तम्भ ही सब कुछ है लेकिन कार्यशैली की बात करें तो कुछ भी नहीं है ।
तथाकथित पत्रकार अपने कार्य को न समझते हुए चंद रुपयों के लालच में शासन प्रशासन की चाटुकारिता में नतमस्तक हो जाना यह दशार्ता की स्थिति बेहद भयानक रूप कर चुकी है इस प्रकार का यह कार्य देश के लिए बेहद खतरनाक है ।

आज पत्रकारिता में ऐसे लोगों का पदार्पण हो रहा है जो कि पत्रकारिता का ककहरा तक नहीं जानते इन्हें सिर्फ ये पता है कि किसी भी पेपर या न्यूज एजेंसी या यूट्यूब चैनल की एजेंसी ले लो और फिर जमकर भ्रष्टाचार करो ठेकेदार बन जाओ इन्हें रोकने व टोकने वाला कोई नहीं है क्योंकि ये पत्रकार हैं इन्हें देश की जिम्मेदारी जो दी गई है ये कुछ भी कर सकते हैं किसी को भी धमका सकते हैं , अवैध कार्य कर सकते हैं या फिर उन कार्यों में लिप्त लोगों को संरक्षण दे सकते हैं । अब एक नया कारनामा और आ गया है पत्रकारिता जगत में तथाकथित पत्रकार सोशल मीडिया का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं और सबसे ज्यादा दुरुपयोग एक्स ऐप्प का किया जा रहा है क्योंकि एक्स एक इतना फास्ट माध्यम है कि अपनी आवाज को चंद समय में अधिकारियों या नेताओं के पास पहुंचा सकते हैं लेकिन सतीश प्रजापति जैसे तथाकथित पत्रकारों ने इसे भी काली कमाई का अड्डा बना दिया है ।
