बाघिन शक्ति की गोरखपुर चिड़ियाघर में हुई मौत

उत्तर प्रदेश

गोरखपुर : शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान गोरखपुर में बुधवार की रात बाघिन शक्ति की मौत हो गई. इसे वर्ष 2024 में मैलानी जंगल से रेस्क्यू कर लाया गया था. इसे रेलवे लाइन के पास गंभीर रूप से घायल अवस्था में वन कर्मियों ने रेस्क्यू किया था. उपचार के बाद जब यह ठीक हुई तो इसे गोरखपुर प्राणी उद्यान में लाया गया. शक्ति नाम इसका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रखा था. चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार बाघिन अपनी मृत्यु से पहले गतिविधियों में काफी कम सक्रिय नजर आ रही थी. वह पानी भी बहुत कम पी रही थी. बुधवार शाम तक उसकी स्थिति बिगड़ गई और रात में मौत हो गई. पशु चिकित्सक की टीम गुरुवार को इसका पोस्टमार्टम करेगी, तब जाकर इसकी मृत्यु का खुलासा हो पाएगा. हालांकि इसकी मौत प्राणी उद्यान के लिए काफी चिंता जनक है, क्योंकि पिछले एक माह के भीतर यहां से तीन वन्य जीवों की मौत हो चुकी है.

मादा भेड़िया भैरवी और बाघ केसरी की भी हुई है मौत: अभी 4 दिन पहले ही शनिवार 3 मई को भैरवी नाम की मादा भेड़िए की मौत हो गई थी. वहीं 30 मार्च को पीलीभीत के जंगल से ले लाए गए केसरी बाघ की भी इलाज के दौरान मौत हुई थी. इसका भी नाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केसरी रखा था. कहीं न कहीं इन तीनों की मौत से चिड़ियाघर में वन्य जीवों की देखभाल और व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है. सुविधाओं और इलाज को लेकर भी चिंता जताई गई है. इस घटना के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव अनुराधा बेमौरी के साथ इटावा लायन सफारी के मुख्य पशु चिकित्सक डॉक्टर आरके सिंह भी मौके पर पहुंच गए हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का खुलासा हो पाएगा.

इलाज के बाद ठीक हुई, अब अचानक हो गई मौत: शक्ति 10 मई 2024 को घायल अवस्था में मिली थी. उस वक्त उसकी उम्र भी करीब 10 माह थी. उसकी गर्दन पर चोट के निशान थे. पिछले पैर में भी चोट थी. जिसकी वजह से वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी, लेकिन जब वह प्राणी उद्यान गोरखपुर लाई गई तो इलाज के बाद वह ठीक हो गई. इसके पूर्व जो दो मौतें हुई हैं, उसमें संक्रमण का पता लगाने के लिए मादा भेड़िया और केसरी का विसरा राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल और आईवीआरआई बरेली दोनों संस्थाओं को भेजा जा गया है. इसके बाद संक्रमण का पता चल सकेगा. इसके साथ ही चिड़ियाघर प्रबंधन ने जानवरों की हेल्थ ऑडिट भी करने का निर्णय लिया है. निदेशक चिड़ियाघर गोरखपुर विकास यादव ने कहा है कि, इन जानवरों की मौत ने चिड़ियाघर प्रशासन को चिंता में डाल दिया है. ऐसा लग रहा है कि मल्टी ऑर्गन फैलियर की वजह से दम तोड़ा है, लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद ही सही चीज सामने आ पाएगी.

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