*वक्त बदल जाएगा …

Video News

कविता

*वक्त बदल जाएगा …

सुमन शर्मा , अध्यापिका दिल्ली सरकार

बदला हैं अब तक भी
और फिर बदल जाएगा
वक्त ही तो हैं
न बदला अगर तो खुद मर जाएगा . . . .
मर जाए वक्त … दोस्त
ये संभव ही नहीं
एक तेरे लिए महज़
ब्रह्मांड का
कोई चक्र नहीं रुक पाएगा
बदला हैं अब तक भी
ये वक्त फिर बदल जाएगा . .
ज्यादा लंबा अकाल और सूखा
धरती को फोड़ देता हैं
फटी धरती से निकला लावा ही
मेघ बन बरसता हैं
तो इस बंजर पर फिर सुख का
सागर लहलाएगा
बदला हैं अब तक भी वक्त
ये फिर बदल जाएगा

कि तैराक , तब तक ही तैर पाता हैं
वो जब तक पानी से हल्का हैं
पक्षी तब तक ही उड़ पाता हैं
जब तक वो हवा से हल्का हैं
दर्द , दबाव , दंभ का आवरण उतार
हल्का हो , तू सुकून पाएगा
वक्त ही तो हैं , फिर बदल जाएगा
मन भारी हैं तो जी भर रो ले
कि दुःख मुक्कमल हो जाए
मन खुश हैं तो जी भर नाच
कि खुशी मुक्कमल हो जाए
एक मुक्कमल होगा तभी दूसरा आ पाएगा
बदला है अब तक भी
वक्त फिर बदल जाएगा
वक्त फिर बदल जाएगा …….।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *